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अपराधशास्त्र Criminology

Q.अपराध के शास्त्रीय सिद्धांत का आधार क्या है?

Ans.इस सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति का आपराधिक व्यवहार, क्रिया के प्रति प्रतिक्रिया मात्र है और कुछ भी नहीं तथा व्यक्ति वही कार्य शीघ्र सीखता है, शीघ्र करता है, जिसके एवज में उसे कुछ लाभ मिलने की आशा हो। इसलिए अपराध पर तभी नियंत्रण पाया जा सकता है जब व्यक्ति को लगे कि अपराध करने पर उसे नुकसान होगा, दंड मिलेगा।

Q.अपराध शास्त्र का महत्व क्या है?

Ans.अपराधशास्त्र में अपराध के कारण और उसके निवारण के उपायों पर विचार किया जाता है। व्यक्ति जन्म से अपराधी नही होता उसकी मनोवृत्ति में सुधार करके उसे समाज में विधि का पालन करने वाला सामान्य नागरिक बनाने का प्रयास किया जाता है।

Q.अपराध शास्त्र के जनक कौन है?

Ans.इन सब आलोचनाओं के बावजूद अपराधशास्त्र मे लोम्ब्रोसों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होने अपराधशास्त्र का वैज्ञानिक पद्धति से अध्ययन किए जाने की शुरुआत की, जिसका दंड नीति के निर्धारण में प्रयोग किया जाता रहा है।

Q.अपराध क्या है अपराध का वर्गीकरण करें?

Ans.यह ऐसी क्रिया या क्रिया में त्रुटि है, जिसके लिये दोषी व्यक्ति को कानून द्वारा निर्धारित दंड दिया जाता है। अर्थात अपराध कानूनी नियमो कानूनों के उल्लंघन करने की नकारात्मक प्रक्रिया है जिससे समाज के तत्वों का विनाश होता है

Q.अपराध के विभिन्न चरण की व्याख्या कीजिए वे कौन से चरण है जिन्हें दण्डनीय बनाया गया है?

Ans.इसी प्रकार मात्र आपराधिक मंशा को अपराध नहीं कहा जा सकता जब तक कि उसके साथ दोषपूर्ण कृत्य शामिल न हो। उदाहरण के लिए, यदि एक व्यक्ति अपहरण करने का केवल विचार बनाता है तो उसे अपहरणकर्ता नहीं कहा जा सकता। उसकी अपराध की मंशा के साथ-साथ अपहरण करने का दोषपूर्ण कृत्य भी शामिल होना चाहिए तभी वह अपराध बनेगा।

Q.सफेदपोश अपराध का क्या अर्थ है?

Ans.श्वेतवसन अपराध वह अपराध होता है जो उच्च वर्ग के व्यक्तियों द्वारा किया जाता है, क्योंकि इन व्यक्तियों के पास धन की कोई कमी नहीं होती; अतः ये व्यक्ति अपराध करके धन की आड़ में बच निकलते हैं।

Q.अपराध रोकथाम में शिक्षा की भूमिका क्या है?

Ans.अपराधों पर अंकुश लगाने और लोगों के चरित्र निमार्ण में शिक्षकों की भूमिका काफी अहम है। सभी लोगांे के सहयोग से ही क्षेत्र में शांति कायम रखी जा सकती है। … अगर गांवों शराबखोरी पर अंकुश लगता है, तो अपराध में भी कमी आएगी।

Q.आपराधिक व्यवहार क्या है?

Ans.आपराधिक व्यवहार को “किसी भी प्रकार के असामाजिक व्यवहार के रूप में कहा जा सकता है, जो आमतौर पर कानून द्वारा दंडनीय है, लेकिन समुदाय द्वारा बताए गए मानदंडों द्वारा दंडित किया जा सकता है”।

Q.बाल अपराध कब और किसने निर्धारित किया?

Ans.बाल अपराध व्यवहार की शैली और समय में विविधता प्रदर्शित करता है। प्रत्येक प्रकार का अपना सामाजिक सन्दर्भ होता है। कारण होते है तथा विरोध और उपचार के अलग स्वरूप होते हैं जो कि उपयुक्त समझे जाते हैं। हावर्ड बेकर (1966) ने चार प्रकार के बाल अपराध बताएँ है।

Q.अपराधी को सजा कौन देता है?

Ans.विषय विशेषज्ञों ने कहा कि पुलिस जांच के बाद न्यायालय में घटना-दुर्घटना व अपराध के पहलुओं का विश्लेषण अभियोजन को करना होता है। … उन्होंने कहा कि पुलिस और अभियोजन अपराधी को सजा दिलाते हैं।

Q. सामाजिक अपराध क्या है?

Ans.सदरलैण्ड के अनुसार अपराध की परिभाषा; “अपराध सामाजिक मूल्यों के लिये ऐसा घातक कार्य है जिसके लिये समाज दण्ड की व्यवस्था करता है। … डैरो के अनुसार; अपराध एक ऐसा कार्य है जो कि देश मे कानून के द्वारा निषिद्ध हो और जिसके लिए दण्ड निर्धारित हो

Q.अपराध क्या है अपराध के प्रमुख कारण?

Ans.(i) वंशानुक्रम- कई विद्वानों ने अपने अध्ययनों में यह पाया कि अपराधी माता-पिता की सन्ताने भी अपराधी थीं। (ii) शारीरिक अयोग्यता- शारीरिक स्थिति या बनावट भी अपराध को जन्म देती है। (iii) बीमारी- अधिक समय तक बीमार रहने से व्यक्ति में चिड़चिड़ापन एवं निराशा पैदा हो जाती है, जो कि आगे चलकर अपराध को जन्म देती है।

Q.अपराध का पर्यायवाची क्या है?

Ans.(अपराध का पर्यायवाची शब्द)

दुष्कर्म, गुनाह, गलती, दोष, पाप, कसूर, खता, जुर्म।

Q.अपराध को कैसे रोका जा सकता है?

Ans.अपराध को रोकने के लिये भरसक प्रयास करना प्रत्येक पुलिस अधिकारी का कर्तव्य है | दण्ड सं0 की धारा 42 एवं 149, 150, 151 व 152 में प्रत्येक पुलिस अधिकारी को सभी प्रकार के अपराधों चाहे वे हस्तक्षेपीय हों या अहस्तक्षेपीय, साधिकार रोक टोक (authoritative intervention) का अधिकार है

Q.आर्थिक अपराध से आप क्या समझते हैं? 

Ans.सरकारी या निजी संपत्ति का दुरुपयोग आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है. इसमें संपत्ति की चोरी, जालसाजी, धोखाधड़ी आदि शामिल हैं. ऐसे मामलों में आर्थिक अपराध की कैटेगरी के हिसाब से केस दर्ज किया जाता है. दूसरे अपराध की तरह आर्थिक अपराध की जांच भी कई एजेंसियां करती हैं

Q.क्या अपराध शास्त्र एक विज्ञान है?

Ans.अपराधअपराधी, आपराधिक स्वभाव तथा अपराधियों के सुधार का वैज्ञानिक अध्ययन अपराध शास्त्र (Criminology) के अन्तर्गत किया जाता है। … इसके अन्तर्गत अपराध के प्रति समाज के रवैया, अपराध के कारण, अपराध के परिणाम, अपराध के प्रकार एवं अपराध की रोकथाम का भी अध्ययन किया जाता है।

Q.अपराध होने पर पुलिस का मुख्य कार्य क्या है?

Ans.आपराधिक गतिविधियों को रोकने, अपराधियों को पकड़ने, अपराधियों के द्वारा किये जाने वाले अपराधों की खोजबीन करने, देश की आंतरिक सम्पत्ति की रक्षा करने और जो अपराधी हैं और उनका अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य जुटाना ही पुलिस का कार्य है। अपराधी घोषित करने के बाद पुलिस संबन्धित व्यक्ति को अदालत को सौंपती है।

Q.अपराध के प्रकार कितने होते हैं?

Ans.

संज्ञेय अपराधआप बिना मेजिस्ट्रेट के वारंट के गिरफ्तार किये जा सकते है।
जमानती अपराधजमानत एक अधिकार है।
जैसे ही आप जमानत प्रस्तुत करते है, पुलिस को जमानत लेना अनिवार्य है।
गैर जमानती अपराधजमानत अधिकार नहीं है।(वह ली या नही ली जा सकेगीं)
जमानत स्वीकार करने का निर्णय न्यायाधीश का होगा।

Q.अपराध का निष्कर्ष क्या है?

Ans.अपराध का कोई एक कारण नहीं होता, इसके कई कारण होते हैं। … बहुत से विद्वान अपराध के लिए व्यक्ति एवं परिस्थिति को जिम्मेवार ठहराते हैं। जबकि कुछ विद्यान अपराध के लिए समाज एवं व्यक्ति दोनों को ही अपराध के लिए समान रूप से उत्तरदायी मानते हैं। इस सब के अतिरिक्त मानसिक कारणों को भी अपराध का का कारण माना जाता है।

Q.किशोर अपराधवृत्ति क्या है?

Ans.जब किसी बच्चे द्वारा कोई कानून-विरोधी या समाज विरोधी कार्य किया जाता है तो उसे किशोर अपराध या बाल अपराध कहते हैं। कानूनी दृष्टिकोण से बाल अपराध 8 वर्ष से अधिक तथा 16 वर्ष से कम आया के बालक द्वारा किया गया कानूनी विरोधी कार्य है जिसे कानूनी कार्यवाही के लिये बाल न्यायालय के समक्ष उपस्थित किया जाता है।

Q.अपराध क्या है अपराध की वर्गीकरण करें?

Ans.संयुक्त राज्य में, आपराधिक अपराधों के तीन प्राथमिक वर्गीकरण हैं – गुंडागर्दी, दुराचार, और उल्लंघन। प्रत्येक वर्गीकरण को अपराध की गंभीरता और अपराध की सजा की मात्रा से एक-दूसरे से अलग किया जाता है, जिसके लिए कोई भी अपराध कर सकता है।

Q.अपराध रोकने में परिवार और समाज की क्या भूमिका है?

Ans.यह काम परिवार से ही शुरू होना चाहिए। यदि किसी महिला के साथ कोई घटना होती है तो परिवार को उसका साथ देना चाहिए, ताकि वह खुलकर अपनी समस्या को उनके सामने रख सके। अपराध रोकने में परिवार और समाज की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि परिवार व समाज ही मर्यादाओं, संस्कारों और कर्तव्यों का बोध कराने वाली सामूहिक व्यवस्था है।

Q.कैसे एक व्यक्ति एक अपराधी बन जाता है?

Ans.एक अपराधी के काम करने का ढंग शिकार की हत्या के दौरान उसके या उसकी आदतों या प्रवृत्तियों है। एक अपराधी के हस्ताक्षर से अपने या उसे मारता में से प्रत्येक में अद्वितीय समानता है। इस तरह के डीएनए के रूप में भौतिक साक्ष्य एकत्र नहीं किया जा सकता है जब मुख्य रूप से, लिंकेज विश्लेषण किया जाता है।

Q.अपराधी कबीले से क्या तात्पर्य है?

Ans.अपराधी कबीले‘ कौन थे? उत्तर: नोमड एवं चरवाहा समुदाय के लोगों को अपराधी कबीले कहा जाता था जिन्हें लकड़ी चुराते हुए पकड़ा जाता था। वन प्रबंधन द्वारा लाए गए बदलावों के कारण नोमड एवं चरवाहा समुदाय लकड़ी काटने, अपने पशुओं को चराने, कंद-मूल एकत्र करने, शिकार एवं मछली पकड़ने से (UPBoardSolutions.com) वंचित हो गए।

Q.अपराध की विशेषताएं क्या है?

Ans.यह ऐसी क्रिया या क्रिया में त्रुटि है, जिसके लिये दोषी व्यक्ति को कानून द्वारा निर्धारित दंड दिया जाता है। अर्थात अपराध कानूनी नियमो कानूनों के उल्लंघन करने की नकारात्मक प्रक्रिया है जिससे समाज के तत्वों का विनाश होता है ।

Q.अपराध के शास्त्रीय सिद्धांत के प्रणेता कौन है? 

Ans.इस सिद्धांत का प्रणेता फ्रेंक (1938) को माना जाता है तथा इस सिद्धांत में समाज के सदस्यों की प्रतिक्रिया के आधार पर अपराध को संभालने का विचार दिया गया था।

Q.भारत में अपराध के मुख्य कारण क्या है?

Ans.अपराध के मनोवैज्ञानिक कारण भी होते है। प्रेम में असफलता, सामाजिक जीवन असफलता, आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने मे असमर्थ होना, परिवार में उपेक्षा, समाज द्वारा बहिष्कार आदि जैसे अनेक कारण है जो व्यक्ति के जीवन को हीनता का बोध करते है।

Q.जघन्य अपराध क्या है?

Ans.किशोरन्याय (देखरेख और संरक्षण) संशोधन विधेयक-2015 पर मंगलवार को राज्यसभा ने मुहर लगा दी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह लागू हो जाएगा। इससे दुष्कर्म, हत्या, अपहरण जैसे सात साल से ज्यादा सजा के प्रावधान वाले जघन्य अपराधों में 16 साल से ज्यादा उम्र के आरोपियों को वयस्क माना जाएगा। उसे वयस्कों की तरह ही सजा दी जा सकेगी।

Q.अपराध के विभिन्न चरण की व्याख्या कीजिए वे कौन से चरण है जिन्हें दण्डनीय बनाया गया है?

Ans.इसी प्रकार मात्र आपराधिक मंशा को अपराध नहीं कहा जा सकता जब तक कि उसके साथ दोषपूर्ण कृत्य शामिल न हो। उदाहरण के लिए, यदि एक व्यक्ति अपहरण करने का केवल विचार बनाता है तो उसे अपहरणकर्ता नहीं कहा जा सकता। उसकी अपराध की मंशा के साथ-साथ अपहरण करने का दोषपूर्ण कृत्य भी शामिल होना चाहिए तभी वह अपराध बनेगा।

Q.अपराध के तत्व क्या है?

Ans.एक अपराध के तत्व प्रकृति में वैध होना चाहिए (कानून में होना चाहिए), एक्टस रीस (मानव आचरण), कार्य (मानव आचरण को नुकसान पहुंचाना चाहिए), नुकसान (किसी अन्य / चीज के लिए), सहमति (मन की स्थिति और मानव आचरण) ), मेंस (मन की स्थिति और दोषी), सजा सुनाई।

Q.एक अपराध की जांच कौन करता है? 

Ans.पुलिस को संज्ञेय अपराध के मामलों में ही प्रथम सूचना रिपोर्ट को रजिस्टर्ड करने तथा अपराध का छान-बीन करने के लिए सक्षम है । संज्ञेय अपराध में सम्मिलित अपराधी को पुलिस न्यायालय की वारंट के बिना गिफ्तारी कर सकता है ।

Q.भारत में कितने प्रकार के अपराध पाये जाते हैं?

Ans.

अपराधदंड
नियंत्रित पदार्थों से संबंधित उल्लंघन (व्यापारियों)10 साल + ठीक रुपये की सश्रम कारावास अप। 1-2 लाख
फाइनेंसिंग यातायात और शरण देने अपराधियोंसश्रम कारावास 10 से 20 साल + ठीक रुपये। 1-2 लाख
प्रयास, उकसाने और आपराधिक साजिशअपराध के समान ही
तैयारी एक अपराध के लिएअपराध के लिए आधा सजा
Q.अपराधी के अधिकार क्या है?
Ans.वह व्यक्ति जिसकी गिरफ्तारी की गई है या रोक कर रखा गया है तथा किसी पुलिस थाना या पूछताछ केन्द्र या अन्य हवालात में अभिरक्षा में रखा जा रहा है, एक दोस्त या रिष्तेदार या उनको जानने या उनका भलाई चाहने वाले व्यक्ति को जितनी जल्दी हो सके सूचित किए जाने का अधिकार प्राप्त होगा, कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है
Q.जिले में बाल अपराध को कितने भागों में बांटा है?
Ans.पूरे अध्ययन को आठ खण्डों में विभक्त किया गया है। प्रथम अध्याय- प्रस्तुत अध्याय विषय-प्रवेश का है। इसमें बालअपराध विषय का सामान्य परिचय, इसकी परिभाषा और अवधारण, आयु एवं व्यवहार की दृष्टि से बालअपराध तथा भारत में बालअपराध और इसकी विशेषताओं का वर्णन किया गया है। अन्त में, अध्ययन के महत्व को भी स्पष्ट किया गया है।
Q.अपराध और बाल अपराध में क्या अंतर है?
 Ans.भारतीय कानून के अनुसार, सोलह वर्ष की आयु तक के बच्चे अगर कोई ऐसा कृत्य करें जो समाज या कानून की नजर में अपराध है तो ऐसे अपराधियों को बालअपराधी की श्रेणी में रखा जाता है. किशोरावस्था में व्यक्तित्व के निर्माण तथा व्यवहार के निर्धारण में वातावरण का बहुत हाथ होता है.
Q.अपराध का कानूनी अर्थ क्या है?
Ans.यह ऐसी क्रिया या क्रिया में त्रुटि है, जिसके लिये दोषी व्यक्ति को कानून द्वारा निर्धारित दंड दिया जाता है। अर्थात अपराध कानूनी नियमो कानूनों के उल्लंघन करने की नकारात्मक प्रक्रिया है जिससे समाज के तत्वों का विनाश होता है ।
Q.अपराधियों को सुधारने में समाज की क्या जिम्मेदारी है?
Ans.समाज को अपराध मुक्त रखने के लिए अपराध और अपराधी के मनोविज्ञान को समझना आवश्यक है,यदि अपराधी की मनोवैज्ञानिक प्रवृति का अध्ययन कर उसको मजबूर करने वाली परस्थितियों को बनने से ही रोक दिया जाय, तो समाज को अपराधमुक्त करना अथवा न्यूनतम अपराध वाले समाज की श्रेणी में लाने में मदद मिल सकती है।
Q.अपराधी जनजाति अधिनियम कब पारित किया गया था?
Ans.अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989.
Q.अपराध के शास्त्रीय सिद्धांत का आधार क्या है?
Ans.इस सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति का आपराधिक व्यवहार, क्रिया के प्रति प्रतिक्रिया मात्र है और कुछ भी नहीं तथा व्यक्ति वही कार्य शीघ्र सीखता है, शीघ्र करता है, जिसके एवज में उसे कुछ लाभ मिलने की आशा हो। इसलिए अपराध पर तभी नियंत्रण पाया जा सकता है जब व्यक्ति को लगे कि अपराध करने पर उसे नुकसान होगा, दंड मिलेगा।
Q.पराअध के कितने चरण होते हैं?
Ans.भारत में किस प्रकार के अपराध है? संज्ञेय अपराध सामान्यतः गंभीर होते है जिनमें पुलिस को तुरन्त कार्य करना होता है। असंज्ञेय अपराध की प्रकृति सामान्यतः निजी दोष (विवाह अथवा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा अपराधहोती है अथवा अन्य अपराध जिनमें पुलिस का हस्तक्षेप वांछनीय नहीं हैं
Q.साइबर अपराध कौन कौन से हैं? 

Ans.साइबर अपराध की मूलभूत जानकारी

जैसे कि घृणित अपराध टेलीमार्केटिंग तथा इंटरनेट धोखाधड़ी पहचान की चोरी तथा क्रेडिट कार्ड एकाउंट की चोरी को साइबर अपराध माना जाता है जब कम्प्यूटर तथा इंटरनेट के इस्तेमाल के माध्यम से अवैध कार्य किए जाते हैं।’

Q.सबसे बड़ा अपराध कौन सा है?

Ans.जोशेफ कोनी –सबसे बड़ा अपराधी है

इस पर आरोप है कि करीब 30,000 मासूम बच्चों और 60 हजार महिलाओं का जबरन अपहरण हत्या बलात्कार और सेक्स स्लेवरी करवाने के लिए कुख्यात है. युगांडा के कई शहरों में इसने भीषण नरसंहार करवाए थे

Q.अपराध शास्त्र के सिद्धांत के लेखक कौन है?
Ans.फ्रायड वर्ग के विद्धान्‌ प्रत्येक अपराध को कामवासना का परिणाम बतलाते है तथा हीली जैसे शास्त्री उसे सामाजिक वातावरण का परिणाम कहते हैं, किंतु ये दोनों मत मान्य नहीं है। एक देश में एक ही प्रकार का धर्म नहीं है।
Q.अपराध रोकथाम में शिक्षा की भूमिका क्या है?
Ans.अपराधों पर अंकुश लगाने और लोगों के चरित्र निमार्ण में शिक्षकों की भूमिका काफी अहम है। सभी लोगांे के सहयोग से ही क्षेत्र में शांति कायम रखी जा सकती है। … अगर गांवों शराबखोरी पर अंकुश लगता है, तो अपराध में भी कमी आएगी।
Q.आपराधिक जनजाति अधिनियम क्या था?
Ans.1870 के दशक से ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में विभिन्न कानूनों को सामूहिक रूप से आपराधिक जनजाति अधिनियम (सीटीए) कहा जाता था । उन्होंने आदतन अपराधियों के रूप में नामित करके पूरे समुदायों का अपराधीकरण कर दिया।
Q.अपराध के कारण कौन कौन से हैं?

Ans.अपराध के कारण (apradh ke karna)

  • व्यक्तिगत कारण अपराध करने के कुछ व्यक्तिगत कारण भी होते है। …
  • आर्थिक कारण निर्धनता अपराध का सबसे मुख्य कारणों मे से एक है। …
  • पारिवारिक और सांस्कृतिक कारक परिवार का स्वरूप व्यक्ति के जीवन के संतुलन का आधार होता है। …
  • चलचित्र …
  • शारीरिक विकार …
  • मनोवैज्ञानिक कारण …
  • सामाजिक विघटन …
  • मद्यपान

Q.एक व्यक्ति द्वारा किसी अपराध को करने का प्रयत्न कब घटित होता है?

Ans.यदि कोई व्यक्ति (१) जान से मार डालने के इरादे से अथवा (२) ऐसी शारीरिक चोट पहुँचाने के इरादे से जिससे मृत्यु संभव हो अथवा (३) यह जानते हुए कि उसके ऐसे कार्य से मृत्यु की संभावना हो सकती है, मृत्यु का कारण बनता है तो ऐसा व्यक्ति अभियोज्य नरहत्या का अपराध करता है (धारा २९९)।

Q.अपराध क्या है अपराध के शास्त्रीय सिद्धांत की व्याख्या कीजिए?

Ans.अपराध, ‘CRIME’ का हिन्दी पर्याय है। वास्तव में ‘CRIME’ शब्द लैटिन भाषा के शब्द ‘CRIMEN’ से उत्पन्न हुआ है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है विलगाव अथवा अलगाव। … इस प्रकार अपराध एक ऐसी घटना है जिसके करने से अपराधी, समाज से विलग हो जाता है अर्थात् उसके मन में समाज के प्रति अलगाव पैदा हो जाता है।