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108 उपनिषद 108 Upanishad

Q.108 उपनिषद कौन कौन से हैं?

Ans. मुख्य उपनिषद एवं गौण उपनिषद

(१) ईश, (२) ऐतरेय (३) कठ (४) केन (५) छान्दोग्य (६) प्रश्न (७) तैत्तिरीय (८) बृहदारण्यक (९) मांडूक्य और (१०) मुण्डक। (१) श्वेताश्वतर (२) कौषीतकि तथा (३) मैत्रायणी।

Q.108 उपनिषद क्या है?

Ans.यह उपनिषद् कहता है कि जीवन में प्राप्त सुखों का उपभोग त्याग के साथ करना चाहिए। अर्थात् समस्त कर्मों एवं कर्तव्यों का पालन ईश्वर की उपासना मानकर ही करना चाहिए। 2. ऊपरी तौर पर भले ही संसार में रहकर कर्तव्यों एवं कर्मों का पालन करना चाहिए, किंतु मन सें संसार का त्याग करना चाहिए।

Q.सबसे छोटा उपनिषद कौन सा है?

Ans.आदि शंकराचार्य ने इनमें से १० उपनिषदों पर टीका लिखी थी। इनमें माण्डूक्योपनिषद सबसे छोटा है (१२ श्लोक) और बृहदारण्यक सबसे बड़ा।

Q.उपनिषद शिक्षा क्या है?

Ans.उपनिषद उद्घोष करते हैं कि मनुष्य देह, इंद्रिय और मन का संघटन मात्र नहीं है, बल्कि वह सुख-दुख, जन्म-मरण से परे दिव्यस्वरूप है, आत्मस्वरूप है। … उपनिषद की शिक्षा मनुष्य देह को मरण धर्मा मानकर सतत् परिवर्तनशील बताती है। मनुष्य आत्मस्वरूप है। अत: संसार के समस्त आकर्षण, साधन, संबंध, बंधन, क्षणिक और भ्रम हैं।

Q.उपनिषदों का क्या महत्व है?

Ans.उपनिषदों में ॠषि मुनियों ने अपने जीवन में प्राप्त ज्ञान और अनुभव का सार डाला है। साहित्य जगत में उपनिषदों का महत्व सर्वोपरि है। … उपनिषदों से प्राप्त ज्ञान सदैव शाश्वत और सनातन है। यह जीवन के लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग है जिससे हम जीवन के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

Q.उपनिषदों की रचना कब हुई?

Ans.वैसे तो उपनिषद की रचना के कालखंड के के बारे में कोई निश्चित मत नहीं है। उपनिषदों की रचना का समय 3000 ईसा पूर्व से 3500 वर्ष पूर्व तक माना जाता है। वेदों और पुराण की रचना का काल भी लगभग यही है। उपनिषद का काल बुद्ध के काल से बहुत पहले का है।

Q.उपनिषद में किस बात पर बल दिया गया है तथा इसका समय क्या माना गया है?

Ans.मनुष्य को आत्मकेंद्रित होना चाहिए। मनुष्य को निरंतर अपने उद्देश्य की और बढ़ना चाहिए। अलगाववाद में विश्वास नहीं करना चाहिए।

Q.उपनिषदों की शैक्षिक उपयोगिता क्या है?

Ans.शिक्षावल्लियों में चित्त की शुद्धता एवं एकाग्रता के लिये शिष्य और आचार्य के लिये कुछ उपास्य विधियों तथा शिष्टाचारों का प्रतिपादन मिलता है। साथ-साथ गुरू-शिष्य सम्बद्ध व्यवहारों का भी वर्णन दृष्टिगोचर होता है। उपनिषदों में परमतत्व की मीमांसा दो विधियों से की गयी है – एक तो विषयगत विश्लेषण से और दूसरे विषयीगत विश्लेषण से।

Q.उपनिषदों की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?

Ans.उपनिषद वेदों मे दिए विषयों को दार्शनिक ढंग से प्रस्तुत करते है। उपनिषदों मे ईश्वर का अस्तित्व, जीव जगत का रहस्य, ईश्वर और जीव के बीच संबंधों को विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया है। मूलतः वेदों को दो भागों मे बांटा गया है। कर्म-काण्ड और ज्ञान काण्ड।

Q.उपनिषद में शूद्र वर्ण को क्या कहा गया है?

Ans.वेद उपनिषद्

Q.प्रामाणिक उपनिषद कितने हैं?

Ans.कुल उपनिषदों की संख्या कितनी है –

वेदों पर आधारित उपनिषदों की संख्या 108 है। इनमें से मुख्य उपनिषदों की संख्या 13 है।

Q.उपनिषद के रचयिता कौन है?

Ans.

ध्यानबिन्दु उपनिषद
लेखकवेदव्यास
चित्र रचनाकारअन्य पौराणिक ऋषि
देशभारत
भाषासंस्कृत

Q.उपनिषद का दूसरा नाम क्या है?

Ans.भारत के समस्त दार्शनिक विचार धाराओं का स्रोत उपनिषद् ही है। वेदान्त , सांख्य, जैन या बौद्ध धर्म ग्रन्थ आदि। उपनिषदों को वेदांत भी कहा जाता है। उपनिषदो का दूसरा नाम वेदान्त ही होता है

Q.उपनिषद का समय क्या माना जाता है?

Ans.उपनिषदों का समय ई. पू 800 के आसपास का माना जाता है।

Q.उपनिषदों में सत्य के विषय में क्या कहा गया है?

Ans.उपनिषदों का अध्ययन नश्वर माया का परित्याग कर शाश्वत सत्य की खोज की ओर प्रेरित करता है। मुण्डकोपनिषद् में कहा गया है, ‘सत्यमेव जयते’ यानी सत्य की हमेशा विजय होती है।

Q.उपनिषदों की प्रार्थना में क्या कामना की गई है?

Ans.उपनिषदों की प्रार्थना में क्या कामना की गई है? उपनिषदों की प्रार्थना में यह कामना की गई है कि हे ईश्वर मुझे ‘असत् से सत् अर्थात् अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले चल, अंधकार से मुझे प्रकाश की ओर ले चल, मृत्यु से अमरत्व की और ले चल।

Q.उपनिषद के अनुसार ब्रह्म क्या है?

Ans.ब्रह्म ब्रह्म (संस्कृत: ब्रह्मन्) हिन्दू (वेद परम्परा, वेदान्त और उपनिषद) दर्शन में इस सारे विश्व का परम सत्य है और जगत का सार है। वो दुनिया की आत्मा है। वो विश्व का कारण है, जिससे विश्व की उत्पत्ति होती है, जिसमें विश्व आधारित होता है और अन्त में जिसमें विलीन हो जाता है।

Q.उपनिषदों के लिखने का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Ans.उपनिषदों के लिखने का मुख्य उद्देश्य था लोगों को सच से परिचित करवाना। इनके द्धारा लोगों को आत्मा-परमात्मा सेबंधी ज्ञान से परिचित करवाया गया।

Q.क्या उपनिषदों के दार्शनिकों के विचार?

Ans.उपनिषदों के दार्शनिक विचार :

ऊपर दिए गए विचारों में ‘आत्मा’ तथा ‘परमात्मा’ का कोई स्थान नहीं है। इसके विपरीत उपनिषदों के अनुसार मानव जीवन का लक्ष्य ‘आत्मा’ को ‘परमात्मा’ में विलीन कर स्वयं परम ब्रह्म हो जाना है।

Q.क्या उपनिषदों के दार्शनिकों के विचार नियति वादियों और भौतिक वादियों से भिन्न थे?

Ans.हाँ, उपनिषदों के दार्शनिकों के विचार नियतिवादियों और भौतिकवादियों के विचार से पूर्णतया भिन्न थे। … उपनिषदों के दार्शनिक विचार-ऊपर लिखित विचारों में आत्मा-परमात्मा को कोई महत्त्व नहीं दिया गया है जबकि उपनिषदों के अनुसार मानव-जीवन का परम उद्देश्य आत्मा को परमात्मा में विलीन कर स्वयं परम ब्रह्म हो जाना है।

Q.उपनिषद और पुराण में क्या अंतर है?

Ans.वेदों का ज्ञान स्वयं परमेश्वर द्वारा दिया गया है ,और पुराणों में वेदों के ज्ञान को सरल भाषा, यानि पुराणों में कथा कहानियो द्वारा समझाया गया है।

Q.उपनिषदों का समय के आसपास से माना जाता है खाली स्थान मे नीचे दिए गए विकल्पों मे से कौनसा विकल्प आएगा?

Ans.उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है पर उपनिषदो का काल ३००० ईसा पूर्व से ३५०० ई पू माना गया है। वेदो का रचना काल भी यही समय माना गया है। उपनिषद् काल का आरम्भ बुद्ध से पर्याप्त पूर्व है। “ग्रेट एजेज ऑफ मैन” के सम्पादक इसे लगभग ८०० ई

Q.उपनिषदों की प्रमुख विशेषताएं क्या है?

Ans.इनमें परमेश्वर, परमात्मा-ब्रह्म और आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का बहुत ही दार्शनिक और ज्ञानपूर्वक वर्णन दिया गया है। उपनिषदों में कर्मकाण्ड को ‘अवर’ कहकर ज्ञान को इसलिए महत्व दिया गया कि ज्ञान स्थूल (जगत और पदार्थ) से सूक्ष्म (मन और आत्मा) की ओर ले जाता है। ब्रह्म, जीव और जगत्‌ का ज्ञान पाना उपनिषदों की मूल शिक्षा है।

Q.छांदोग्य उपनिषद में किसका वर्णन है?

Ans.अब निश्चय ही कामनाओं की समृद्धि के साधन का वर्णन किया जाता है- अपने उपगन्तव्यों की इस प्रकार उपासना करे- जिस साम के द्वारा उद्गाता को स्तुति करना हो उस साम का चिन्तन करे । 8। वह साम जिस ऋचा में प्रतिष्ठित हो उस ऋचा का, जिस ऋषि वाला हो उस ऋषि का तथा जिस जिस देवता की स्तुति करने वाला हो उस देवता का चिन्तन करे

Q.उपनिषदों की कुल कितनी संख्या है

Ans.वैसे तो उपनिषद की रचना के कालखंड के के बारे में कोई निश्चित मत नहीं है। उपनिषदों की रचना का समय 3000 ईसा पूर्व से 3500 वर्ष पूर्व तक माना जाता है। वेदों और पुराण की रचना का काल भी लगभग यही है। उपनिषद का काल बुद्ध के काल से बहुत पहले का है।

Q.सबसे पुराना उपनिषद कौन सा है?

Ans.सबसे पुराना उपनिषद कौन सा है?

  • (१) ईशावास्योपनिषद्,
  • (२) केनोपनिषद्
  • (३) कठोपनिषद्
  • (४) प्रश्नोपनिषद्
  • (५) मुण्डकोपनिषद्
  • (६) माण्डूक्योपनिषद्
  • (७) तैत्तरीयोपनिषद्
  • (८) ऐतरेयोपनिषद्

Q.उपनिषदों की रचना कब हुई?

Ans.वैसे तो उपनिषद की रचना के कालखंड के के बारे में कोई निश्चित मत नहीं है। उपनिषदों की रचना का समय 3000 ईसा पूर्व से 3500 वर्ष पूर्व तक माना जाता है। वेदों और पुराण की रचना का काल भी लगभग यही है। उपनिषद का काल बुद्ध के काल से बहुत पहले का है।

Q.उपनिषदों का क्या महत्व है?

Ans.उपनिषदों में ॠषि मुनियों ने अपने जीवन में प्राप्त ज्ञान और अनुभव का सार डाला है। साहित्य जगत में उपनिषदों का महत्व सर्वोपरि है। … उपनिषदों से प्राप्त ज्ञान सदैव शाश्वत और सनातन है। यह जीवन के लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग है जिससे हम जीवन के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

Q.उपनिषद शिक्षा क्या है?

Ans.उपनिषद उद्घोष करते हैं कि मनुष्य देह, इंद्रिय और मन का संघटन मात्र नहीं है, बल्कि वह सुख-दुख, जन्म-मरण से परे दिव्यस्वरूप है, आत्मस्वरूप है। … उपनिषद की शिक्षा मनुष्य देह को मरण धर्मा मानकर सतत् परिवर्तनशील बताती है। मनुष्य आत्मस्वरूप है। अत: संसार के समस्त आकर्षण, साधन, संबंध, बंधन, क्षणिक और भ्रम हैं।

Q.सबसे छोटा उपनिषद कौन सा है?

Ans.आदि शंकराचार्य ने इनमें से १० उपनिषदों पर टीका लिखी थी। इनमें माण्डूक्योपनिषद सबसे छोटा है (१२ श्लोक) और बृहदारण्यक सबसे बड़ा।

Q.वेद पुराण उपनिषद क्या है?

Ans.वेदों को अपौरुषेय (जिसे कोई व्यक्ति न कर सकता हो, यानि ईश्वर कृत) माना जाता है। … वेद मंत्रों की व्याख्या करने के लिए अनेक ग्रंथों जैसे ब्राह्मण-ग्रन्थ, आरण्यक और उपनिषद की रचना की गई। इनमे प्रयुक्त भाषा वैदिक संस्कृत कहलाती है जो लौकिक संस्कृत से कुछ अलग है।

Q.पुराण और उपनिषद कितने हैं?

Ans. वैसे तो वेदो की संख्या 6 है। उपनिषद 108 और महापुराण 18 है।

Q.उपनिषद में शूद्र को क्या कहा गया है?

Ans.पशु का। माने जिसकी चेतना पशु समान है उसको शूद्र बोलते हैं।

Q.प्रामाणिक उपनिषद कितने हैं?

Ans.कुल उपनिषदों की संख्या कितनी है –

वेदों पर आधारित उपनिषदों की संख्या 108 है। इनमें से मुख्य उपनिषदों की संख्या 13 है। इनके नाम नीचे लिखे हुए हैं

Q.उपनिषद का दूसरा नाम क्या है?

Ans.भारत के समस्त दार्शनिक विचार धाराओं का स्रोत उपनिषद् ही है। वेदान्त , सांख्य, जैन या बौद्ध धर्म ग्रन्थ आदि। उपनिषदों को वेदांत भी कहा जाता है। उपनिषदो का दूसरा नाम वेदान्त ही होता है।

Q.उपनिषद का समय क्या माना जाता है?

Ans.उपनिषदों का समय ई. पू 800 के आसपास का माना जाता है।

Q.उपनिषद में किस बात पर बल दिया गया है तथा इसका समय क्या माना गया है?

Ans.उपनिषदों में किस बात पर बल दिया गया? मनुष्य को आत्मकेंद्रित होना चाहिए। मनुष्य को निरंतर अपने उद्देश्य की और बढ़ना चाहिए। अलगाववाद में विश्वास नहीं करना चाहिए

Q.उपनिषदों की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?

Ans.उपनिषद वेदों मे दिए विषयों को दार्शनिक ढंग से प्रस्तुत करते है। उपनिषदों मे ईश्वर का अस्तित्व, जीव जगत का रहस्य, ईश्वर और जीव के बीच संबंधों को विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया है। मूलतः वेदों को दो भागों मे बांटा गया है। कर्म-काण्ड और ज्ञान काण्ड।

Q.उपनिषदों की शैक्षिक उपयोगिता क्या है?

Ans.शिक्षावल्लियों में चित्त की शुद्धता एवं एकाग्रता के लिये शिष्य और आचार्य के लिये कुछ उपास्य विधियों तथा शिष्टाचारों का प्रतिपादन मिलता है। साथ-साथ गुरू-शिष्य सम्बद्ध व्यवहारों का भी वर्णन दृष्टिगोचर होता है। उपनिषदों में परमतत्व की मीमांसा दो विधियों से की गयी है – एक तो विषयगत विश्लेषण से और दूसरे विषयीगत विश्लेषण से।

Q.उपनिषद के अनुसार ब्रह्म क्या है?

Ans.ब्रह्म ब्रह्म (संस्कृत: ब्रह्मन्) हिन्दू (वेद परम्परा, वेदान्त और उपनिषद) दर्शन में इस सारे विश्व का परम सत्य है और जगत का सार है। वो दुनिया की आत्मा है। वो विश्व का कारण है, जिससे विश्व की उत्पत्ति होती है, जिसमें विश्व आधारित होता है और अन्त में जिसमें विलीन हो जाता है।

Q.उपनिषदों की प्रार्थना में क्या कामना की गई है?

Ans.उपनिषदों की प्रार्थना में क्या कामना की गई है? उपनिषदों की प्रार्थना में यह कामना की गई है कि हे ईश्वर मुझे ‘असत् से सत् अर्थात् अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले चल, अंधकार से मुझे प्रकाश की ओर ले चल, मृत्यु से अमरत्व की और ले चल।

Q.उपनिषदों के लिखने का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Ans.उपनिषदों के लिखने का मुख्य उद्देश्य था लोगों को सच से परिचित करवाना। इनके द्धारा लोगों को आत्मा-परमात्मा सेबंधी ज्ञान से परिचित करवाया गया।

Q.उपनिषदों का समय के आसपास से माना जाता है खाली स्थान मे नीचे दिए गए विकल्पों मे से कौनसा विकल्प आएगा?

Ans.उपनिषदों के काल के विषय मे निश्चित मत नही है पर उपनिषदो का काल ३००० ईसा पूर्व से ३५०० ई पू माना गया है। वेदो का रचना काल भी यही समय माना गया है। उपनिषद् काल का आरम्भ बुद्ध से पर्याप्त पूर्व है। “ग्रेट एजेज ऑफ मैन” के सम्पादक इसे लगभग ८०० ई.

Q.पुराण और उपनिषद कितने हैं?

Ans.वेद पुराण उपनिषद कितने हैं? वैसे तो वेदो की संख्या 6 है। उपनिषद 108 और महापुराण 18 है

Q.उपनिषदों का मनुष्य के जीवन में क्या महत्व है?

Ans.जीवन के सभी आध्यात्मिक, दार्शनिक विचार और चिन्तन उपनिषदों में हैं। उपनिषदों से प्राप्त ज्ञान सदैव शाश्वत और सनातन है। यह जीवन के लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग है जिससे हम जीवन के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। जन-जन के लिए उपनिषदों ने अज्ञानपूर्ण अन्धकार को दूर करने के लिए ॠषियों द्वारा रचित किया गया ग्रन्थ है।

Q.क्या उपनिषदों के दार्शनिकों के विचार?

Ans.उपनिषदों के दार्शनिक विचार :

ऊपर दिए गए विचारों में ‘आत्मा’ तथा ‘परमात्मा’ का कोई स्थान नहीं है। इसके विपरीत उपनिषदों के अनुसार मानव जीवन का लक्ष्य ‘आत्मा’ को                ‘परमात्मा’ में विलीन कर स्वयं परम ब्रह्म हो जाना है।

Q.क्या उपनिषदों के दार्शनिकों के विचार नियति वादियों और भौतिक वादियों से भिन्न थे?

Ans. हाँ, उपनिषदों के दार्शनिकों के विचार नियतिवादियों और भौतिकवादियों के विचार से पूर्णतया भिन्न थे। … उपनिषदों के दार्शनिक विचार-ऊपर लिखित विचारों में आत्मा-परमात्मा को कोई महत्त्व नहीं दिया गया है जबकि उपनिषदों के अनुसार मानव-जीवन का परम उद्देश्य आत्मा को परमात्मा में विलीन कर स्वयं परम ब्रह्म हो जाना है।

Q.उपनिषद शिक्षा क्या है?

Ans.उपनिषद उद्घोष करते हैं कि मनुष्य देह, इंद्रिय और मन का संघटन मात्र नहीं है, बल्कि वह सुख-दुख, जन्म-मरण से परे दिव्यस्वरूप है, आत्मस्वरूप है। ...उपनिषदकी शिक्षा मनुष्य देह को मरण धर्मा मानकर सतत् परिवर्तनशील बताती है। मनुष्य आत्मस्वरूप है। अत: संसार के समस्त आकर्षण, साधन, संबंध, बंधन, क्षणिक और भ्रम हैं।

Q.संस्कृत में उपनिषद कितने हैं?

Ans.ये संस्कृत में लिखे गये हैं। इनकी संख्या लगभग 108 है, किन्तु मुख्य उपनिषद 13 हैं। हर एक उपनिषद किसी न किसी वेद से जुड़ा हुआ है। इनमें परमेश्वर, परमात्मा-ब्रह्म और आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का बहुत ही दार्शनिक और ज्ञानपूर्वक वर्णन दिया गया है।

Q.पहला उपनिषद कौन सा है?

Ans.ईशावास्योपनिषद् समस्त उपनिषदों में प्रथम उपनिषद् है। उज्जैन. शुक्लयजुर्वेद संहिता का चालीसवां अध्याय ही ईशावास्योपनिषद के नाम से जाना जाता है।

Q.उपनिषदों का समय क्या माना गया है?

Ans.उपनिषदों का समय ई. पू 800 के आसपास का माना जाता है।

Q.1 केनोपनिषद के केन शब्द की सही व्याख्या का करें इस उपनिषद का नाम केनोपनिषद क्यों है?

Ans.सामवेदीय ‘तलवकार ब्राह्मण’ के नौवें अध्याय में इस उपनिषद का उल्लेख है। यह एक महत्त्वपूर्ण उपनिषद है। इसमें केन’ (किसके द्वारा) का विवेचन होने से इसे ‘केनोपनिषद’ कहा गया है। … प्रथम और द्वितीय खण्ड में गुरु-शिष्य की संवाद-परम्परा द्वारा उस (केन) प्रेरक सत्ता की विशेषताओं, उसकी गूढ़ अनुभूतियों आदि पर प्रकाश डाला गया है।

Q.उपनिषद में किस बात पर बल दिया गया है तथा इसका समय क्या माना गया है?

Ans. मनुष्य को आत्मकेंद्रित होना चाहिए। मनुष्य को निरंतर अपने उद्देश्य की और बढ़ना चाहिए। अलगाववाद में विश्वास नहीं करना चाहिए।

Q.उपनिषद का योग में क्या महत्व है समझाइए?

Ans.अतः उपनिषदों में न केवल ‘ योग ‘ शब्द का प्रयोग मात्र ही है अपितु योग पद्धति तथा उसके अनेक स्तरों की व्यवस्था भी है। उपनिषदों का अध्ययन करने पर यह ज्ञात होता है कि इनमें किस प्रकार से यौगिक प्रक्रिया और उसकी उपादेयता सिद्ध की गई है।

Q.उपनिषद में शूद्र को क्या कहा गया है?

Ans.पशु का। माने जिसकी चेतना पशु समान है उसको शूद्र बोलते हैं।

Q.छांदोग्य उपनिषद में किसका वर्णन है?

Ans.अब निश्चय ही कामनाओं की समृद्धि के साधन का वर्णन किया जाता है- अपने उपगन्तव्यों की इस प्रकार उपासना करे- जिस साम के द्वारा उद्गाता को स्तुति करना हो उस साम का चिन्तन करे । 8। वह साम जिस ऋचा में प्रतिष्ठित हो उस ऋचा का, जिस ऋषि वाला हो उस ऋषि का तथा जिस जिस देवता की स्तुति करने वाला हो उस देवता का चिन्तन करे ।

Q.उपनिषदों की प्रार्थना में क्या कामना की गई है?

Ans.उपनिषदों की प्रार्थना में क्या कामना की गई है? उपनिषदों की प्रार्थना में यह कामना की गईहै कि हे ईश्वर मुझे ‘असत् से सत् अर्थात् अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले चल, अंधकार से मुझे प्रकाश की ओर ले चल, मृत्यु से अमरत्व की और ले चल।

Q.उपनिषदों के लिखने का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Ans.उपनिषदों के लिखने का मुख्य उद्देश्य था लोगों को सच से परिचित करवाना। इनके द्धारा लोगों को आत्मा-परमात्मा सेबंधी ज्ञान से परिचित करवाया गया।

Q.उपनिषदों की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?

Ans.उपनिषद वेदों मे दिए विषयों को दार्शनिक ढंग से प्रस्तुत करते है। उपनिषदों मे ईश्वर का अस्तित्व, जीव जगत का रहस्य, ईश्वर और जीव के बीच संबंधों को विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया है। मूलतः वेदों को दो भागों मे बांटा गया है। कर्म-काण्ड और ज्ञान काण्ड।

Q.उपनिषद के अनुसार ब्रह्म क्या है?

Ans.ब्रह्म ब्रह्म (संस्कृत: ब्रह्मन्) हिन्दू (वेद परम्परा, वेदान्त और उपनिषद) दर्शन में इस सारे विश्व का परम सत्य है और जगत का सार है। वो दुनिया की आत्मा है। वो विश्व का कारण है, जिससे विश्व की उत्पत्ति होती है, जिसमें विश्व आधारित होता है और अन्त में जिसमें विलीन हो जाता है।

Q.उपनिषदों का प्रथम भाषांतर फारसी भाषा में कब हुआ?

Ans.उपनिषदों के फारसी मे अनुवादक “दारा शिकोह” / पुण्य तिथि – 30 अगस्त 1659.

Q.उपनिषदों की प्रमुख विशेषताएं क्या है

Ans.उपनिषद की प्रमुख विशेषताएं लिखिए।

उपनिषद में सच्चाई पर बल दिया गया है। … उपनिषद का समय ईसा पूर्व आठ सौ के लगभग माना जाता है। उपनिषद में सत्य की खोज के प्रति उत्साह दिखाई देता है। उपनिषद भारतीय आर्यों के चिंतन से कुछ आगे के चिंतन पर आधारित है

Q.क्या उपनिषदों के दार्शनिकों के विचार?

Ans.उपनिषदों के दार्शनिक विचार :

ऊपर दिए गए विचारों में ‘आत्मा’ तथा ‘परमात्मा’ का कोई स्थान नहीं है। इसके विपरीत उपनिषदों के अनुसार मानव जीवन का लक्ष्य ‘आत्मा’ को ‘परमात्मा’ में विलीन कर स्वयं परम ब्रह्म हो जाना है।

Q.उपनिषदों में किस बात पर बल दिया गया?

Ans.मनुष्य को आत्मकेंद्रित होना चाहिए। मनुष्य को निरंतर अपने उद्देश्य की और बढ़ना चाहिए। अलगाववाद में विश्वास नहीं करना चाहिए।