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समाज शास्त्र के मूल तत्त्व Samaj Sastra Ke Mul Tatwa

Q.समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र क्या है?

Ans.प्रमुख विद्वानों द्वारा विभिन्न दृष्टिकोणों के आधार पर समाजशास्त्र की जो परिभाषाएँ दी गई हैं उनसे स्पष्ट ज्ञात होता है कि समाजशास्त्र मुख्य रूप से समाज, सामाजिक सम्बन्धों, सामाजिक जीवन, सामाजिक घटनाओं, व्यक्तियों के व्यवहार एवं कार्यों, सामाजिक समूहों एवं सामाजिक अन्तक्रियाओं का अध्ययन करने वाला विषय है।

Q.समाजशास्त्र की उत्पत्ति कब हुई थी?

Ans.भारत में समाजशास्त्र की शुरुआत 1914 ई. में हुई। 1838 ई. से पूर्व समाज का अध्ययन इतिहास, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र आदि विषयों में होता था।

Q.समाजशास्त्र की वास्तविक प्रकृति क्या है?

Ans.समाजशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है, प्राकृतिक विज्ञान नहीं – समाजशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है क्योंकि इसकी विषयवस्तु मौलिक रूप से सामाजिक है अर्थात् इनमें समाज, सामाजिक घटनाओं सामाजिक प्रक्रियाओं, सामाजिक संबंधों तथा अन्य सामाजिक पहलुओं एवं तथ्यों का अध्ययन किया जाता है। … अतः यह एक वास्तविक विज्ञान है, आदर्शात्मक नहीं।

Q.समाजशास्त्र में राज्य की क्या स्थिति है?

Ans.1. समाजशास्त्र में विभिन्न संस्थाओं का अध्ययन किया जाता है। जिन संस्थाओं के अध्ययन की बात पर समाजशास्त्रियों ने बल दिया है उसमें परिवार, राज्य, समाज, सामाजिक क्रिया, औद्योगिक समाज आदि का उल्लेख विशेष रूप से किया गया है। सभी समाजशास्त्रियों ने समाजशास्त्र के अध्ययन विधि के विशेष स्वरूप का भी उल्लेख किया है।

Q.समाजशास्त्र के विषय क्षेत्र को कितने भागों में बांटा गया है?

Ans.जहाँ सोशियस का अर्थ है- समाज तथा लोगस का अर्थ है- अध्ययन अथवा विज्ञान। गिडिंग के अनुसार- “समाजशास्त्र समाज का विज्ञान है।” समाजशास्त्र के विषयक्षेत्र को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया है- (i) स्वरूपात्मक/विशिष्टतावादी संप्रदाय (ii) समन्वयवादी संप्रदाय।

Q.समाजशास्त्र की उत्पत्ति का आधार क्या है?

Ans.एक विशिष्ट एवं पृथक विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र की उत्पत्ति का श्रेय फ्रांस के दार्शनिक आगस्त काम्टे को है जिन्होंने सन 1838 में समाज के इस नवीन विज्ञान को समाजशास्त्र नाम दिया । तब से समाजशास्त्र का निरंतर विकास होता जा रहा है । … समाज के अध्ययन की परंपरा उतनी ही प्राचीन है जितना मानव का सामाजिक जीवन ।

Q.हम समाजशास्त्र क्यों पढ़ते हैं?

Ans.इसका प्रयोग समाज समग्र रूप से समूह के कल्याण व उन्नति के लिए करता है। सामाजिक नियंत्रण का स्वरूप एक समाज से दूसरे समाज में बदल जाता है, क्योंकि प्रत्येक समाज के अपने नियम एवं प्रतिमान हैं। समाज के विभिन्न प्रकार जैसे व्यक्तिवादी/व्यष्टिवादी समाज या जन सामूहिक समाज अपने सदस्यों से विविध अपेक्षाएँ रखते हैं

Q.समाजशास्त्र का अर्थ क्या है समाजशास्त्र की प्रकृति की समीक्षा कीजिए?

Ans.जानसन के अनुसार “समाजशास्त्र वह विज्ञान है जो सामाजिक समूहों, उनके आन्तरिक स्वरूपों या संगठन के प्रकारों, उन प्रक्रियाओं का जो संगठन के इन स्वरूपों को बनाये रखने अथवा उन्हें परिवर्तित करने का प्रयत्न करती है तथा समूहों के बीच संबंधों का अध्ययन करता हैं। मैकाइवर और पेज “समाजशास्त्र समाजिक सम्बन्धों का जाल हैं।

Q.समाज की प्रकृति क्या है?

Ans.समाज (society) एक से अधिक लोगों के समुदायों से मिलकर बने एक वृहद समूह को कहते हैं जिसमें सभी व्यक्ति मानवीय क्रियाकलाप करते हैं। मानवीय क्रियाकलाप में आचरण, सामाजिक सुरक्षा और निर्वाह आदि की क्रियाएं सम्मिलित होती हैं। … किसी समाज के आने वाले व्यक्ति एक दूसरे के प्रति परस्पर स्नेह तथा सहृदयता का भाव रखते हैं।

Q.समाजशास्त्र अर्थशास्त्र में क्या अंतर है?

Ans.अर्थशास्त्र उपभोग, उत्पादन एवं धन वितरण का अध्ययन है। समाजशास्त्र सामाजिक विज्ञान है और वह मनुष्यों से जुड़े तमाम संस्थानों व सरोकारों से सीधा संबंध रखता है। समाजशास्त्र मानवीय व्यवहारों, उनकी सामाजिक परिस्थितियों तथा दशाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है। मनुष्य के समस्त आर्थिक क्रियाकलापों से अर्थशास्त्र का सीधा संबंध है।

Q.समाज से क्या आशय है उदाहरण देकर समझाइए?

Ans.समाज एक से अधिक लोगों के समुदायों से मिलकर बने एक वृहद समूह को कहते हैं जिसमें सभी व्यक्ति मानवीय क्रियाकलाप करते हैं। मानवीय क्रियाकलाप में आचरण, सामाजिक सुरक्षा और निर्वाह आदि की क्रियाएं सम्मिलित होती हैं। … किसी समाज के आने वाले व्यक्ति एक दूसरे के प्रति परस्पर स्नेह तथा सहृदयता का भाव रखते हैं।

Q.समाजशास्त्र की विषय वस्तु को मैंने कितने भागों में वर्गीकृत किया है?

Ans.यह सभी विषय समाजशास्त्र की विभिन्न शाखाओं के रूप में विकसित हो चुके हैं । उदाहरण के रूप में, धर्म का समाजशास्त्र, भाषा का समाजशास्त्र, कानून का समाजशास्त्र, परिवार का समाजशास्त्र आदि ।

Q.ग्रामीण समाजशास्त्र की विषय वस्तु में क्या सम्मिलित नहीं है?

Ans.विचलित कर देने वाली घटनाओं का वर्तमान विज्ञानों अथवा पद्धतियों द्वारा सन्तोषप्रद अध्ययन नहीं किया जाता, उसी समय कोई न कोई विज्ञान प्रकाश में आता है’ यही बात हम ग्रामीण समाजशास्त्र के बारे में भी कह सकते है।

Q.समाजशास्त्र का उद्भव और विकास कैसे हुआ?

Ans.इनके अनुसार, प्राचीन काल में ग्रीस , रोम , भारत , चीन और अरब देशों में समाजशास्त्र का उदय हुआ | सामाजिक जीवन का विश्लेषण करने वाले विभिन्न सामाजिक विज्ञानों जैसे इतिहास , राजनीतिशास्त्र, दर्शन , अर्थशास्त्र तथा प्राकृतिक विज्ञानों में प्रयुक्त अध्ययन- विधियों के सम्मिलित प्रभाव के परिणामस्वरूप समाजशास्त्र की को उत्पति .

Q.समाजशास्त्र का उदय कैसे हुआ?

Ans.एक पृथक विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र का उदय उन्नीसवीं शताब्दी में हुआ। यूरोप उस समय फ्रांसीसी तथा औद्योगिक क्रांतियों के कारण अनंत परिवर्तनों के दौर से गुजर रहा था। सच तो यह है कि समाजशास्त्र को नए औद्योगिक समाज का विज्ञान माना जा सकता है।

Q.भारत में समाजशास्त्र की उत्पत्ति के सम्बन्ध में आप क्या जानते हैं?

Ans.भारत में समाजशास्त्र एक नवीन विज्ञान है। यद्यपि उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में यूरोप में समाजशास्त्र का एक व्यवस्थित विषय के रूप में विकास प्रारम्भ हो चुका था, परन्तु भारत में बीसवीं शताब्दी के पहले तक ऐसा कोई विज्ञान नहीं था जो समाज का सम्पूर्णता में अध्ययन करे।

Q.समाजशास्त्र का महत्व क्या है?

Ans.अपने या अन्य समाज के विषय में वैज्ञानिक आधार पर सही परिचय समाजशास्त्र के द्वारा ही सम्भव है, क्योंकि समाजशास्त्र के अध्ययन से ही समाज की उत्पत्ति, विकास और विशेषताओं का वैज्ञानिक और सामान्य ज्ञान हमें प्राप्त हो सकता है। एक सामाजिक विज्ञान के रूप में, समाजशास्त्र हमारा परिचय सम्पूर्ण मानवता एवं समाज से कराता है।

Q.समाजशास्त्र का शाब्दिक अर्थ क्या है?

Ans.समाजशास्त्र एक नया अनुशासन है अपने शाब्दिक अर्थ में समाजशास्त्र का अर्थ है – समाज का विज्ञान। इसके लिए प्रयुक्त अंग्रेजी शब्द सोशियोलॉजी लेटिन भाषा के सोसस तथा ग्रीक भाषा के लोगस दो शब्दों से मिलकर बना है जिनका अर्थ क्रमशः समाज का विज्ञान है। इस प्रकार सोशियोलॉजी शब्द का अर्थ भी समाज का विज्ञान होता है।

Q.समाजशास्त्र क्या है उत्तर?
Ans.समाजशास्त्र मानव समाज का अध्ययन है। … समाजशास्त्र, पद्धति और विषय वस्तु, दोनों के मामले में एक विस्तृत विषय है। परम्परागत रूप से इसकी केन्द्रियता सामाजिक स्तर-विन्यास (या “वर्ग”), सामाजिक संबंध, सामाजिक संपर्क, धर्म, संस्कृति और विचलन पर रही है, तथा इसके दृष्टिकोण में गुणात्मक और मात्रात्मक शोध तकनीक, दोनों का समावेश है।
Q.वर्तमान युग में समाजशास्त्र के व्यवहारिक पक्ष की क्या उपयोगिता?
Ans.व्यावहारिक समाजशास्त्र की उपयोगिता या महत्व … व्यावहारिक समाजशास्त्र का ज्ञान समस्याओं का निराकरण ही प्रस्तुत नहीं करता, बल्कि एक समाज के सदस्यों को अपने सामाजिक जीवन तथा समस्याओं के प्रति जागरूक भी बनाता है। व्यावहारिक समाजशास्त्र की यह वह उपयोगिता है जिसे ज्ञान की कोई भी दूसरी शाखा स्थानापन्न नहीं कर सकती।
Q.समाजशास्त्र और मनोविज्ञान में क्या संबंध है?
Ans.समाजशास्त्र समाज का विज्ञान है । … समाजशास्त्र का अध्ययन विषय समान है जबकि समाज मनोविज्ञान का अध्ययन विषय व्यक्ति का व्यवहार है |समाजशास्त्र और समाज मनोविज्ञान में अगला अंतर यह है कि समाजशास्त्र सामाजिक घटनाओं का अध्ययन करता है जबकि मनोविज्ञान घटना का अध्ययन मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से करता है ।
Q.समाज और विश्व को समझने में स्वयं की समझ कैसे सहायता करती है?
Ans.इस प्रक्रिया के द्वारा मनुष्य अपनी शक्तियों क्षमताओं, कमियों आदि को समझ सकता है। मनुष्य अपनी बाह्य क्रियाओं के प्रति भी सजग, सतर्क, जागृत तथा विवेकशील भी बन जाता है। शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वयं से परिचय कराने के लिए प्रेरित करता है तथा अपने अधिगम के लिए स्वयं जिम्मेदार बनाने के लिए तैयार करना चाहिए।
Q.भारत में समाजशास्त्र की वृद्धि वृत्ति के रूप में कैसे हुई?

Ans.1951 के बाद का समय- शोध में वृद्धि

1969 में इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च की स्थापना हुई। भारत में योजनाबद्ध विकास की शुरुआत में समाजशास्त्र को बढ़ावा दिया। धीरे-धीरे समाज शास्त्रियों को योजना तथा विकास के कार्यों में शामिल किया जाने लगा। अब ग्रामीण जन जीवन से संबंधित शोध कार्य में होने लगे थे।

Q.समाजशास्त्र की प्रकृति से संबंधित मुख्य विशेषताएं क्या है?
Ans.समाजशास्त्र समाज का विज्ञान हैं। यदि समाज की परिस्थितियाँ परिवर्तित न हो तो समाज के नियम भी नही बदलेंगे और एक ही प्रकार के सभी समाजों पर समान रूप से लागू होंगे। कारण सम्बन्धों पर आधारित है- हर एक कार्य के पीछे एक कारण होता है अर्थात् कार्य और कारण का घनिष्ठ सम्बन्ध होता है।
Q.समाजशास्त्र का सर्वप्रथम प्रयोग कब हुआ?
Ans.समाजशास्त्र शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग लगभग 1938 में फ्राँस के महान दार्शनिक ‘ऑगस्त कॉम्ट’ (August comte) ने किया था।
Q.भारतीय समाजशास्त्र के जनक कौन हैं?
Ans.गोपालपुर नमाजगढ़, सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश से सतीश कुमार यादव. समाजशास्त्र के जनक ऑगस्त कॉम्त का पूरा नाम था इज़िदोर मारी ऑगस्त फ़्रांस्वा हाविए कॉम्त. उनका जन्म दक्षिण पश्चिम फ़्रांस के मॉन्टपैलिए नगर में 1798 में हुआ था. समाजशास्त्र लोगों, समुदायों और समाजों के जीवन का अध्ययन है.
Q.जॉनसन समाजशास्त्र को क्या मानते हैं?
Ans.जॉनसन के अनुसार, “समाजशास्त्र सामाजिक समूह का विज्ञान है।” मोरिस गिन्सवर्ग के अनुसार, “समाजशास्त्र मानवीय अंतःक्रियाओं का और अंत:संबंधों, उनकी दशाओं और परिणामों का अध्ययन है।”
Q.समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य क्या है?
Ans.समाजशास्त्र मानव और समाज का, उसकी क्रियाओं-प्रक्रियाओं और समाज में घटित होने वाली समस्त घटनाओं के सामाजिक पक्ष का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से अध्ययन करता है। … इसे ही ‘समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य, (Sociological Perspective) कहते हैं।
Q.समाजशास्त्र तुलनात्मक रूप से एक नया क्या है?
Ans.अन्य शब्दों में, समाजशास्त्र वह विज्ञान है जो समाज व्यवस्था से सम्बन्धित विभिन्न पक्षों का अध्ययन करता है। उपर्युक्त सभी परिभाषाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि समाजशास्त्र सम्पूर्ण समाज का एक समग्र इकाई के रूप में अध्ययन करने वाला विज्ञान है। इसमें सामाजिक सम्बन्धों का व्यवस्थित अध्ययन किया जाता है।
Q.समाजशास्त्र समाज का वैज्ञानिक अध्ययन है यह कथन किसका है?
Ans.मानवीय संबंधों की जटिलता के अध्ययन का विश्लेषण दोनों को यथार्थता की कसौटी पर कसने के लिए समाजशास्त्र का अविर्भाव एक समाजविज्ञान के रूप में 19वीं शताब्दी में हुआ। के अनुसार – “ समाजशास्त्र समाज का विज्ञान है”। गिडिंग्स के अनुसार – “ समाजशास्त्र समाज का वैज्ञानिक अध्ययन है”।
Q.समाजशास्त्र के स्वरूप आत्मक संप्रदाय का संस्थापक कौन है?
Ans.फ्रांसीसी दार्शनिक अगस्टे कोम्टे (1798-1857) – जिसे “समाजशास्त्र का पिता” कहा जाता था – ने समाज के वैज्ञानिक अध्ययन का उल्लेख करने के लिए 1838 में “समाजशास्त्र” शब्द का इस्तेमाल किया।
Q.समाजशास्त्र एक पद्धति है यह कथन किसका है?
Ans.सामाजिक जीवन के ढाँचे और कार्यों का विज्ञान है।” यंग के अनुसार, “समाजशास्त्र समूहों में मनुष्यों के व्यवहार का अध्ययन करता है।” इसी भाँति, सोरोकिन के अनुसार, “समाजशास्त्र सामाजिक-सांस्कृतिक घटनाओं के सामान्य स्वरूपों, प्ररूपों और विभिन्न प्रकार के अन्तःसम्बन्धों का सामान्य विज्ञान है।” उपर्युक्त विवेचन से हमें पता
Q.समाजशास्त्र समाज का विज्ञान है किसकी परिभाषा है?
Ansके अनुसार – “ समाजशास्त्र समाज का विज्ञान है”। गिडिंग्स के अनुसार – “ समाजशास्त्र समाज का वैज्ञानिक अध्ययन है”। मैक्स बेवर के अनुसार – “समाजशास्त्र वह विज्ञान है जो कि सामाजिक क्रिया के व्याख्यात्मक बोध को प्रस्तुत करने का प्रयास करता है, जिससे उसकी प्रक्रिया व प्रभावों की बुद्धिसंगत व्याख्या की जा सके।
Q.समाजशास्त्र का उदय कैसे हुआ?
Ans.एक पृथक विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र का उदय उन्नीसवीं शताब्दी में हुआ। यूरोप उस समय फ्रांसीसी तथा औद्योगिक क्रांतियों के कारण अनंत परिवर्तनों के दौर से गुजर रहा था। सच तो यह है कि समाजशास्त्र को नए औद्योगिक समाज का विज्ञान माना जा सकता है।
Q.भारत में समाजशास्त्र की उत्पत्ति के संबंध में आप क्या जानते हैं?
Ans.भारत में समाजशास्त्र की शुरुआत 1914 ई. में हुई। 1838 ई. से पूर्व समाज का अध्ययन इतिहास, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र, दर्शनशास्त्र आदि विषयों में होता था।
Q.समाजशास्त्र धर्म का अध्ययन कैसे करता है?
Ans.समाजशास्त्रीय परिदृश्य में धर्म समाज के लिए अनेक कार्यों का निर्वाह करता है। यह सामाजिक नियंत्रण का एक स्वरूप है। धर्म सभी ज्ञात समाजों में विद्यमान है। … समाजशास्त्री धर्म के लोक स्वरूप का अध्ययन करता है, क्योंकि सामाजिक परिदृश्य में इसका सर्वाधिक महत्व है, जो समाज और सामाजिक संस्था का ध्यान रखता है।
Q.समाजशास्त्र से हमें क्या सीखने को मिलता है?
Ans. समाजशास्त्र आपको समाज में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के समूहों, उनके आपसी संबंधों एवं आपके अपने जीवन में उनके महत्त्व के बारे में बतलाता है। परंतु समाजशास्त्र केवल आपका या अन्य लोगों का स्थान निर्धारित करने में मदद करने एवं विभिन्न सामाजिक समूहों के स्थानों का वर्णन करने के अलावा और भी बहुत कुछ सिखा सकता है।
Q.समाजशास्त्र की प्रकृति से संबंधित मुख्य विशेषताएं क्या है?
Ans.समाजशास्त्र समाज का विज्ञान हैं। यदि समाज की परिस्थितियाँ परिवर्तित न हो तो समाज के नियम भी नही बदलेंगे और एक ही प्रकार के सभी समाजों पर समान रूप से लागू होंगे। कारण सम्बन्धों पर आधारित है- हर एक कार्य के पीछे एक कारण होता है अर्थात् कार्य और कारण का घनिष्ठ सम्बन्ध होता है।
Q. समाजशास्त्र की विशेषताएं क्या है?
Ans.इस शास्त्र के अन्तर्गत मुख्य रूप से समाज का अध्ययन किया जाता हैं। समाजशास्त्र की मुख्य विषय-वस्तु सामाजिक सम्बन्ध है। … यह समाज का वर्णन अर्थात् सामाजिक संबंधों व घटनाओं का वर्णन करता है। यह वर्णन कल्पनात्मक एवं संशयात्मक नही बल्कि व्यवस्थित व क्रमबद्ध है।27-Apr-2020
Q.समाजशास्त्र और इतिहास में क्या संबंध है?
Ans.इतिहास विशेष विज्ञान है, जिसका संबंध ऐतिहासिक घटनाओं से है, समाजशास्त्र सामान्य विज्ञान है, जिसका संबंध सभी प्रकार के संबंधों से है। … इतिहास मूर्त का जबकि समाजशास्त्र अमूर्त का अध्ययन है। इतिहास विशिष्ठ घटनाओं का अध्ययन करता है जबकि समाजशास्त्र विभिन्न घटनाओं के आधार पर सामान्यीकरण करता है।
Q.समाजशास्त्र और राजनीति शास्त्र का क्या संबंध है?
Ans.संक्षेप, में राजनीतिक समाजशास्त्र समाज के सामाजिक आर्थिक पर्यावरण से उत्पन्न तनावों और संघर्षो का अध्ययन कराने वाला विषय है। राजनीति विज्ञान की भांति राजनीतिक समाजशास्त्र समाज में शक्ति सम्बन्धों के वितरण तथा शक्ति विभाजन का अध्ययन हैं इस दृष्टि से कतिपय विद्वान इसे राजनीति विज्ञान का उप-विषय भी कहते है।
Q.समाजशास्त्र का क्या महत्व है?
Ans.समाजशास्त्र उन सभी सामाजिक सम्बन्धों, मानव समूहों के बीच परस्पर सहयोग व संघर्ष का क्रमबद्ध अध्ययन करता है जिस प्रकार अन्य सामाजिक विद्वान जैसे अर्थशास्त्र, भूगोल, इतिहास, मनोविज्ञान, राजनीतिविज्ञान आदि अपने विषयों का एक खास अध्ययन विधि के द्वारा विधिवत अध्ययन करता है। इसलिए इसे विज्ञान का दर्जा भी दिया जाता है।
Q.समाजशास्त्र का जन्म कब हुआ था?
Ans.क्रिया के संदर्भ में मनुष्यों के व्यवहार अध्ययन। समाजशास्त्र की उतपत्ति: (1) समाजशास्त्र का जन्म 19वीं शताब्दी में हुआ।
Q.समाजशास्त्र के उद्भव और विकास का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है?
Ans.समाजशास्त्र के उद्गम और विकास का अध्ययन समाजशास्त्र में अनेक व्यक्तिगत एवं सामाजिक पहलुओं की जानकारी के लिए महत्वपूर्ण है। 1. इंग्लैंड औद्योगिक क्रांति का केंद्रबिंदु था। इस तथ्य की जानकारी अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि किस प्रकार शहरीकरण या कारखाना उत्पादन पद्धति ने सभी आधुनिक समाजों को प्रभावित किया।
Q.समाजशास्त्र धर्म का अध्ययन कैसे करता है?
Ans.समाजशास्त्रीय परिदृश्य में धर्म समाज के लिए अनेक कार्यों का निर्वाह करता है। यह सामाजिक नियंत्रण का एक स्वरूप है। धर्म सभी ज्ञात समाजों में विद्यमान है। … समाजशास्त्री धर्म के लोक स्वरूप का अध्ययन करता है, क्योंकि सामाजिक परिदृश्य में इसका सर्वाधिक महत्व है, जो समाज और सामाजिक संस्था का ध्यान रखता है।
Q.समाजशास्त्र का अर्थ क्या है समाजशास्त्र की प्रकृति की समीक्षा कीजिए?
Ans.जानसन के अनुसार “समाजशास्त्र वह विज्ञान है जो सामाजिक समूहों, उनके आन्तरिक स्वरूपों या संगठन के प्रकारों, उन प्रक्रियाओं का जो संगठन के इन स्वरूपों को बनाये रखने अथवा उन्हें परिवर्तित करने का प्रयत्न करती है तथा समूहों के बीच संबंधों का अध्ययन करता हैं। मैकाइवर और पेज “समाजशास्त्र समाजिक सम्बन्धों का जाल हैं।
Q.समाजशास्त्र एक विज्ञान है क्यों?
Ans.समाजशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है, प्राकृतिक विज्ञान नहीं – समाजशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है क्योंकि इसकी विषयवस्तु मौलिक रूप से सामाजिक है अर्थात् इनमें समाज, सामाजिक घटनाओं सामाजिक प्रक्रियाओं, सामाजिक संबंधों तथा अन्य सामाजिक पहलुओं एवं तथ्यों का अध्ययन किया जाता है। … अतः यह एक वास्तविक विज्ञान है, आदर्शात्मक नहीं।
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