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10 Religious Books In Hindi

1.महाभारत (वेदव्यास)

                                                                        Mahabharat(Vedvyas)

महाभारत भारत का एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है, जो स्मृति के इतिहास वर्ग में आता है। इसे भारत भी कहा जाता है। यह काव्यग्रंथ भारत का अनुपम धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ हैं। विश्व का सबसे लंबा यह साहित्यिक ग्रंथ और महाकाव्य, हिन्दू धर्म के मुख्यतम ग्रंथों में से एक है।

‘महाभारत’ को महाकाव्य रूप में लिखा गया भारत का ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ माना जाता है। यह विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य ग्रंथ है। इसमें लगभग एक लाख श्लोक हैं, जो इलियड और ओडिसी से सात गुना ज्यादा माना जाता है। महाभारत का एक छोटा-सा हिस्सा मात्र है गीता। महाभारत में वेदों और अन्य हिन्दू ग्रंथों का सार निहित है। महाभारत को महर्षि वेद व्यासजी ने लिखा था।

Q.महाभारत रचयिता कौन थे? 

Ans.वेदव्यास

Q. महाभारत का असली नाम क्या है?

Ans. महाभारत का पुराना नाम “जयसहिंता” था इससे पहले इसे भारत महाकाव्य के नाम से जाना भी जाना जाता था। महाभारत में लगभग 1,10,000 श्लोक हैं। यह महाकाव्य जयसहिंता, भारत और महाभारत इन 3 नामों से लोकप्रिय हैं। इस ग्रंथ की रचना 3100 ईशा पूर्व की के लगभग मानी जाती है

Q. महाभारत हमें क्या संदेश देती है?

Ans. लड़ाई से डरने वाले मिट जाते हैं : जिंदगी एक उत्सव है, संघर्ष नहीं। लेकिन जीवन के कुछ मोर्चों पर व्यक्ति को लड़ने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। जो व्यक्ति लड़ना नहीं जानता, युद्ध उसी पर थोपा जाएगा या उसको सबसे पहले मारा जाएगा। महाभारत में पांडवों को यह बात श्रीकृष्ण ने अच्‍छे से सिखाई थी

Q. महाभारत का विजेता कौन था?
Ans. महाभारत को पांडवो ने जीता था
Q.महाभारत का नाम महाभारत क्यों पड़ा?
Ans. अतः ‘भारत’ ग्रंथ की इस महत्ता (महानता) को देखकर देवताओं और ऋषियों ने इसे ‘महाभारत’ नाम दिया और इस कथा के कारण मनुष्यों में भी यह काव्य ‘महाभारत’ के नाम से सबसे अधिक प्रसिद्ध हुआ।
अगर आप यह किताब पड़ना चाहते  तो आप यहाँ से पढ़ भी सकते है   महाभारत

 2.108 उपनिषद

                                                                         108 Upnishad
                                                     
हिंदू धर्म में 4 वेद है। इन्हीं वेदों का ज्ञान उपनिषदों में भी है। इनकी संख्या 108 मानी गई है। ईशावास्योपनिषद् समस्त उपनिषदों में प्रथम उपनिषद् है।

ब्राह्मणों की रचना ब्राह्मण पुरोहितों ने की थी, लेकिन उपनिषदों की दार्शनिक परिकल्पनाओं के सृजन में क्षत्रियों का भी महत्त्वपूर्ण भाग था। उपनिषद उस काल के द्योतक हैं जब विभिन्न वर्णों का उदय हो रहा था और क़बीलों को संगठित करके राज्यों का निर्माण किया जा रहा था। राज्यों के निर्माण में क्षत्रियों ने प्रमुख भूमिका अदा की थी, हालांकि उन्हें इस काम में ब्राह्मणों का भी समर्थन प्राप्त था। डॉ. राधाकृष्णन के अनुसार उपनिषद शब्द की व्युत्पत्ति उप (निकट), नि (नीचे), और षद (बैठो) से है। इस संसार के बारे में सत्य को जानने के लिए शिष्यों के दल अपने गुरु के निकट बैठते थे। उपनिषदों का दर्शन वेदान्त भी कहलाता है, जिसका अर्थ है वेदों का अन्त, उनकी परिपूर्ति। इनमें मुख्यत: ज्ञान से सम्बन्धित समस्याऔं पर विचार किया गया है।

Q.108 उपनिषद कौन कौन से हैं?

Ans. मुख्य उपनिषद एवं गौण उपनिषद

Q.108 उपनिषद क्या है?

Ans.यह उपनिषद् कहता है कि जीवन में प्राप्त सुखों का उपभोग त्याग के साथ करना चाहिए। अर्थात् समस्त कर्मों एवं कर्तव्यों का पालन ईश्वर की उपासना मानकर ही करना चाहिए। 2. ऊपरी तौर पर भले ही संसार में रहकर कर्तव्यों एवं कर्मों का पालन करना चाहिए, किंतु मन सें संसार का त्याग करना चाहिए।

Q.सबसे छोटा उपनिषद कौन सा है?

Ans.आदि शंकराचार्य ने इनमें से १० उपनिषदों पर टीका लिखी थी। इनमें माण्डूक्योपनिषद सबसे छोटा है (१२ श्लोक) और बृहदारण्यक सबसे बड़ा।

Q.उपनिषद शिक्षा क्या है?

Ans.उपनिषद उद्घोष करते हैं कि मनुष्य देह, इंद्रिय और मन का संघटन मात्र नहीं है, बल्कि वह सुख-दुख, जन्म-मरण से परे दिव्यस्वरूप है, आत्मस्वरूप है। … उपनिषद की शिक्षा मनुष्य देह को मरण धर्मा मानकर सतत् परिवर्तनशील बताती है। मनुष्य आत्मस्वरूप है। अत: संसार के समस्त आकर्षण, साधन, संबंध, बंधन, क्षणिक और भ्रम हैं।

Q.उपनिषदों का क्या महत्व है?

Ans.उपनिषदों में ॠषि मुनियों ने अपने जीवन में प्राप्त ज्ञान और अनुभव का सार डाला है। साहित्य जगत में उपनिषदों का महत्व सर्वोपरि है। … उपनिषदों से प्राप्त ज्ञान सदैव शाश्वत और सनातन है। यह जीवन के लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग है जिससे हम जीवन के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

Q.उपनिषदों की रचना कब हुई?

Ans.वैसे तो उपनिषद की रचना के कालखंड के के बारे में कोई निश्चित मत नहीं है। उपनिषदों की रचना का समय 3000 ईसा पूर्व से 3500 वर्ष पूर्व तक माना जाता है। वेदों और पुराण की रचना का काल भी लगभग यही है। उपनिषद का काल बुद्ध के काल से बहुत पहले का है।

Q.उपनिषद में किस बात पर बल दिया गया है तथा इसका समय क्या माना गया है?

Ans.मनुष्य को आत्मकेंद्रित होना चाहिए। मनुष्य को निरंतर अपने उद्देश्य की और बढ़ना चाहिए। अलगाववाद में विश्वास नहीं करना चाहिए।

3.पतंजलि के योगदर्शन 

                                                           The Yogadarsana Of Patanjal

पतंजलि का योगदर्शन, समाधि, साधन, विभूति और कैवल्य इन चार पादों या भागों में विभक्त है। समाधिपाद में यह बतलाया गया है कि योग के उद्देश्य और लक्षण क्या हैं और उसका साधन किस प्रकार होता है। साधनपाद में क्लेश, कर्मविपाक और कर्मफल आदि का विवेचन है।

योगसूत्र,योग दर्शन  का मूल ग्रंथ है। यहसात दर्शनों में से एक शास्त्र है और योगशास्त्र का एक ग्रंथ है। योगसूत्रों की रचना ३००० साल के पहले पतंजलि  ने की। इसके लिए पहले से इस विषय में विद्यमान सामग्री का भी इसमें उपयोग किया।योगसूत्र में चित्त को एकाग्र करकेईश्वर  में लीन करने का विधान है। पतंजलि  के अनुसार चित्त की वृत्तियों को चंचल होने से रोकना (चित्तवृत्तिनिरोधः) ही योग है। अर्थात् मन को इधर-उधर भटकने न देना, केवल एक ही वस्तु में स्थिर रखना ही योग है।

योगसूत्र मध्यकाल में सर्वाधिक अनूदित  किया गया प्राचीन भारतीय ग्रन्थ है, जिसका लगभग ४० भारतीय भाषाओं तथा दो विदेशी भाषाओं (प्राचीनजावा भाषा  एवंअरबी में अनुवाद हुआ। यह ग्रंथ १२वीं से १९वीं शताब्दी तक मुख्यधारा से लुप्तप्राय हो गया था किन्तु १९वीं-२०वीं-२१वीं शताब्दी में पुनः प्रचलन में आ गया है।

Q.पतंजलि के अनुसार योग क्या है?

Ans.पतंजलि के अनुसार चित्त की वृत्तियों को चंचल होने से रोकना (चित्तवृत्तिनिरोधः) ही योग है। अर्थात् मन को इधर-उधर भटकने न देना, केवल एक ही वस्तु में स्थिर रखना ही योग है।

Q.योगदर्शन के अनुसार प्राणायाम की संख्या कितनी है?

Ans.योग के आठ अंगों में से चौथा अंग है प्राणायाम। प्राणायाम करते या श्वास लेते समय हम तीन क्रियाएँ करते हैं- 1. पूरक 2. कुम्भक 3.

Q.पतंजलि के दर्शन का क्या नाम है?

Ans.योगदर्शन छः आस्तिक दर्शनों (षड्दर्शन) में से एक है। इसके प्रणेता पतञ्जलि मुनि हैं। यह दर्शन सांख्य दर्शन के ‘पूरक दर्शन‘ के नाम से प्रसिद्ध है।

Q.पतंजलि योग सूत्र में वृत्ति का शाब्दिक अर्थ क्या है?

Ans.अब समझते हैं वृत्ति क्या है-वृत्ति एकवचन न होकर बहुवचन में प्रयोग होता है, इसका अर्थ है वृत्ति एक नहीं अपितु एक से अधिक होती हैं। … बहुतों ने निरोध का शाब्दिक अर्थ किया है रोक देना अर्थात चित्त की वृत्तियों को रोक देना योग कहलाता है।

Q.पतंजलि योग सूत्र के अनुसार योग के कितने अंग है?

Ans.महर्षि पतंजलि ने योग को मन की चंचलता को स्थिर करने की प्राचीनतम तकनीक कहा है. योगसूत्र में उन्होंने पूर्ण कल्याण के अलावा शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शुद्धि के लिए आठ अंगों के अष्टांग योग का वर्णन किया है

4.लंका दहन 

                                                                                  lanka dahan
                                           
लंका दहन की कहानी हिन्दू पौराणिक कथा रामायण के समय की है, जब भगवान विष्णु जी ने पृथ्वी पर इंसानों को लंकापति रावण नाम के राक्षस के आतंक से बचाने के लिए श्रीराम के रूप में अवतार लिया. इस युग में भगवान श्रीराम ने अयोध्या के राजा दशरथ जी के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में जन्म लिया. भगवान विष्णु के इस अवतार की कहानी को रामायण के 7 अध्याय में बताया गया है. उनमें से एक कांड है युद्ध कांड, इस कांड को लंका कांड भी कहा जाता है. लंका दहन की कहानी इसी कांड में दर्शाई गई है, जब भगवान राम के सबसे बड़े भक्त हनुमान जी माता सीता की खोज करने के लिए लंका गए और वहाँ माता सीता से भेंट करने के बाद उन्होंने लंका का दहन किया. इस कहानी को विस्तार से नीचे दर्शाया गया है
भगवान राम अपनी पत्नी सीता और अपने छोटे भाई लक्ष्मण के साथ वन में जीवन व्यतीत कर रहे थे, तभी लंकापति रावण ने उनकी पत्नी सीता का हरण कर लिया. भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण माता सीता की खोज के लिए दर – दर भटक रहे थे, तब उनकी मुलाकात भगवान शिव के वानर अवतार हनुमान जी से हुई. वे प्रभु श्रीराम के सबसे बड़े भक्त थे. श्रीराम ने हनुमान जी को सीता हरण के बारे में बताया, तब वे श्रीराम और उनके भाई लक्ष्मण को किष्किन्धा के वानर राजा सुग्रीव के पास ले गए. वहाँ श्रीराम की वानर राज सुग्रीव के साथ मित्रता हो गई. सुग्रीव ने अपने भाई बालि के बारे में श्रीराम को बताया, जिसने सुग्रीव के राज्य तथा उनकी पत्नी को उनसे छीन लिया था, वह बहुत ही बलशाली था तब श्रीराम ने बालि का वध कर सुग्रीव को उनका राज्य एवं उनकी पत्नी को सम्मान सहित सौंपा. उसके बाद सुग्रीव ने श्रीराम से माता सीता को खोजने में मदद करने का वादा किया. श्रीराम और उनके भाई लक्ष्मण, सुग्रीव और उनकी सेना को साथ लिए माता सीता की खोज करने के लिए चल पड़े

Q.हनुमान ने लंका दहन कैसे किया?

Ans.हनुमानजी अट्टहास करके गरजे और बढ़कर आकाश से जा लगे। तब वे अपनी जलती हुई पूंछ से दौड़कर एक महल से दूसरे महल पर चढ़कर उनमें आग लगाने लगे। देखते ही देखते नगर जलने लगता है और चारों ओर अफरा-तफरी व चीख-पुकार मच जाती है। पुराणों में लंकादहन के पीछे भी एक ओर रोचक बात जुड़ी है।

Q.लंका दहन कैसे हुआ?

Ans.महादेव की माया से विश्रवा का मन उस नगरी पर ललचा गया था, इसलिए उन्होंने महादेव से दक्षिणा के रूप में महल ही मांग लिया। महादेव ने विश्रवा को लंकापुरी दान कर दी। … शाप के कारण शिव के अवतार हनुमान जी ने लंका जलाई और विश्रवा के पुत्र रावण, कुंभकर्ण और कुल का विनाश हुआ

Q.लंका जाते समय राम ने हनुमान को क्या दिया?

Ans.हनुमान, अंगद, जामवंत, नल और को साथ लेकर सुग्रीव वहाँ पहुँचे। … समुद्र पर चर्चा – हनुमान ने राम को सीता द्वारा दिया हुई।

Q.हनुमान जी ने लंका क्यों जलाई?

Ans.विभीषण, रावण का छोटा भाई था। जब हनुमानजी, माता सीता को खोजने लंका गए, तब रावण ने हनुमानजी की पूंछ में आग प्रज्वलित करवा दी। हनुमानजी ने अपनी जलती पूंछ से पूरी लंका को जला दिया। लेकिन उन्होंने अशोक वाटिका को इसलिए नहीं जलाया क्योंकि वहां माता सीता रहती थीं

Q.हनुमान जी ने लंका में आग कैसे लगाए?

Ans. सीता जी का पता लगाते लगते जब हनुमान लंका पहुचे, तो अशोक वाटिका में माता सीता को देख प्रभु श्रीराम की निशानी दी। अशोक वाटिका में फल खाकर व पेड़ों को तोड़ते देख रावण के सैनिक हनुमान को बंधक बनाकर रावण के सामने पेश किया। रावण ने पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया। पूंछ में आग लगाते ही हनुमान ने लंका में आग लगा दी।

Q.हनुमान जी ने सीता को कैसे पता लगाया?

Ans.सीता माता की खोज के लिए अंगद कहते हैं कि हनुमान जी से शक्तिशाली कोई नहीं है और समुद्र को सिर्फ वही लांघ सकते हैं। … तब जामवंत हनुमान जी को उनकी शक्तियां याद दिलाते हैं। शक्तियां याद आने के बाद समुद्र लांघकर वे लंका पहुंच जाते हैं। यहां वे रावण के राजमहल में सीता जी को खोजते हैं, पर वे वहां नहीं मिलतीं।

 

5.भागवदगीता 

                                                                          Bhagavad Geeta

 

महाभारत  युद्ध आरम्भ होने के ठीक पहले भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिया वह श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से प्रसिद्ध है। यह महाभारत  के भीष्मपर्व का अंग है। गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं।

गीता की गणना प्रस्थानत्रयी में की जाती है, जिसमेंउपनिषद और ब्रह्मसूत्र  भी सम्मिलित हैं। अतएव भारतीय परम्परा के अनुसार गीता का स्थान वही है जो उपनिषद् और धर्मसूत्रों का है। उपनिषदों को गौ  (गाय) और गीता को उसका दुग्ध कहा गया है। इसका तात्पर्य यह है कि उपनिषदों की जो अध्यात्म विद्या थी, उसको गीता सर्वांश में स्वीकार करती है। उपनिषदों की अनेक विद्याएँ गीता में हैं। जैसे, संसार के स्वरूप के संबंध में अश्वत्थ विद्या, अनादि अजन्मा ब्रह्म के विषय में अव्ययपुरुष विद्या, परा प्रकृति या जीव के विषय में अक्षरपुरुष विद्या और अपरा प्रकृति या भौतिक जगत के विषय में क्षरपुरुष विद्या। इस प्रकार वेदो  के ब्रह्मवाद और उपनिषदों के अध्यात्म, इन दोनों की विशिष्ट सामग्री गीता में संनिविष्ट है। उसे ही पुष्पिका के शब्दों में ब्रह्मविद्या कहा गया है

महाभारत  के युद्ध के समय जब अर्जुन युद्ध करने से मना करते हैं तब श्री कृष्ण उन्हें उपदेश देते है और कर्म व धर्म के सच्चे ज्ञान से अवगत कराते हैं। श्री कृष्ण के इन्हीं उपदेशों को “भगवत गीता” नामक ग्रंथ में संकलित किया गया है।

Q.गीता में क्या क्या लिखा है?

Ans.गीता के आदर्शों पर चलकर मनुष्य न केवल खुद का कल्याण कर सकता है, बल्कि वह संपूर्ण मानव जाति की भलाई कर सकता है

  • 1- क्रोध पर नियंत्रण …
  • 2 नजरिया से बदलाव …
  • 3- मन पर नियंत्रण आवश्यक …
  • 4- आत्म मंथन करना चाहिए …
  • 5- सोच से निर्माण …
  • 6- कर्म का फल …
  • 7- मन को ऐसे करें नियंत्रित …
  • 8- सफलता प्राप्त करें
Q.गीता कब पढ़नी चाहिए?
Ans.जैसे पूजा-पाठ और जाप के लिए सुबह का समय सर्वोत्तम रहता है उसी प्रकार से गीता को भी सुबह के समय पढ़ना चाहिए। गीता बहुत ही पवित्र ग्रंथ है। इसे कभी भी गंदे हाथों से न छुएं। सुबह उठकर स्नानदि करने के पश्चात गीता का पाठ करें।
Q.भगवत गीता की कीमत कितनी है?
Ans.यानि कि भगवत गीता की एक प्रति का दाम 37,950 रूपये यानि क़रीब 38,000 रूपये है. आरटीआई के तहत दी गई जानकारी के मुताबिक तन्वी स्टेशनर्स नाम के एक दुकान से इन 10 प्रतियों की खरीद की गई है.
Q.गीता कितने प्रकार की है?
Ans.लेकिन, क्या आपको पता है कि सिर्फ भगवत गीता नहीं नहीं बल्क‍ि 300 से ज्यादा विभिन्न प्रकार के भगवत गीता उपलब्ध हैं. श्रीमद्भगवत गीता के अलावा ये गीता भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं जो असल में गीता का ही अलग अलग रूप हैं. जो असल में ज्ञान तत्व को दर्शाती हैं.
Q.गीता से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
Ans.दुनिया में बहुत से धार्मिक किताबें हैं जो धर्म के मार्ग पर ले जाने की प्रेरणा देती हैं परंतु भागवत गीता एक ऐसा किताब है सिर्फ धर्म ही नही बल्कि अपने मन, शरीर, बुद्धि इन सभी को नियंत्रण करने के लिए शिक्षा प्राप्त होती हैं । भागवत गीता में हमें वह शिक्षा मिलती हैं जहां अन्याय के विरुद्ध आप स्वयं लड़ सकते है ।
Q.भगवत गीता का साहित्यिक अर्थ क्या है?
Ans.इसका मतलब यह है कि आर्यभट्ट जी की गणना अनुसार श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान 5154 वर्ष पूर्व दिया था। प्रश्न. भगवान ने किस दिन और किस तिथि को गीता सुनाई? उत्तर –भगवान श्रीकृष्ण ने मोक्षदा एकादशी (रविवार) के दिन उन्हें श्रीमदभगवद्गीता का महान और सार्वकालिक उपदेश दिया था।
Q.गीता के अनुसार धर्म क्या है?
Ans.अर्थात गीता का पहला शब्द धर्म और अंतिम शब्द मम है । … इस प्रकार धर्म का तात्पर्य यह है कि वह जो किसी वस्तु का अस्तित्व प्रकट करता है । जैसे सूर्य का धर्म प्रकाश है अग्नि का धर्म उष्णता है । धर्म का अर्थ केवल साधुता या नैतिकता नहीं है वरन अपने सच्चे स्वरूप को पहचान उसी के अनुरूप कार्य करना है ।

6 .प्रेमचन्द की सर्वश्रेष्ठ कहानियां

    Premchand Ki Sarvshreshth Kahaniyan

प्रेमचंद की 5 सर्वश्रेष्ठ कहानियां
  • गोदान गोदान उपन्यास प्रेमचंद का अंतिम और सबसे महत्त्वपूर्ण उपन्यास माना जाता है. …
  • दो बैलों की कथा दो बैलों की कथा दो बैल हीरा और मोती की कहानी है. …
  • पूस की रात पूस की रात की मूल समस्या गरीबी की है.

प्रेमचंद की कहानियों में से हम यहाँ तेरह किशोरोपयोगी कहानियाँ संगृहीत कर रहे हैं। हमारा संकलन उन कहानियों की शिक्षा, उपादेयता तथा किशोरवयस्क पाठकों के मनोरंजन के दृष्टिकोण से हुआ है। इनसे प्रेमचंद की कहानी-कला की विभिन्न विशेषताओं का भी पाठक को परिचय प्राप्त हो सकेगा। हमें आशा है कि यह संग्रह सभी प्रकार से सफल एवं उपयोगी सिद्ध होगा।

अनुक्रम
प्राक्कथन
१.ईदगाह
२जुलूस
३. दो बैलो की कथा
४.रामलीला
५. बड़े भाईसाहब
६. नशा
७. लाग डॉट
८. आत्माराम
९. प्रेरणा
१०. सवा सेर गेहूँ
११. गुल्ली डंडा
१२. लॉटरी
१३ सतरंज के खिलाड़ी
…७
…११
…२९
…४३
…५९
…६८
…८०
…९०
…९८
…१०८
…१२३
…१३२
…१४३
…१६३

Q. प्रेमचंद पूर्व हिंदी कहानियों में सर्वश्रेष्ठ कहानी कौन सी है?

Ans.सद्गति – प्रेमचंद

‘ठाकुर का कुआं’, ‘सवा सेर गेहूँ’, ‘मोटेराम का सत्याग्रह’, जैसी प्रेमचंद की अनेक कहानियों में अंतर्भूत मानवीय संवेदना तथा जाति व्यवस्था के प्रति उनका दृष्टिकोण इस कहानी को कालजयी और आधुनिक बनाता है.

Q.प्रेमचंद की सबसे पहली कहानी कौन सी थी?

Ans.प्रेमचंद‘ नाम से उनकी पहली कहानी बड़े घर की बेटी ज़माना पत्रिका के दिसम्बर १९१० के अंक में प्रकाशित हुई। १९१५ ई. में उस समय की प्रसिद्ध हिंदी मासिक पत्रिका सरस्वती के दिसम्बर अंक में पहली बार उनकी कहानी सौत नाम से प्रकाशित हुई। १९१८ ई.

Q.प्रेमचंद की कहानियों का संकलन मानसरोवर कितने खंड है?

Ans.मानसरोवर (कथा संग्रह) प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानियों का संकलन है। उनके निधनोपरांत मानसरोवर नाम से ८ खण्डों में प्रकाशित इस संकलन में उनकी दो सौ से भी अधिक कहानियों को शामिल किया गया है। कॉपीराइट अधिकारों से प्रेमचंद की रचनाओं के मुक्त होने के उपरांत मानसरोवर का प्रकाशन अनेक प्रकाशकों द्वारा किया गया है।

Q.प्रेमचंद अपने घर में कौन सी विधा है?

Ans.प्रेमचंद घर में’ साहित्य में ‘संस्मरण’ गद्य विधा की रचना है

Q.प्रेमचंद जी की मृत्यु कब हुई?

Ans. 8 अक्तूबर 1936

Q.मुंशी प्रेमचंद जी ने कौनसे उपन्यास में स्त्रियों के आभूषण प्रेम के दुष्परिणामों का चित्रण किया है?

Ans.ग़बन प्रेमचन्द के एक विशेष चिन्ताकुल विषय से सम्बन्धितउपन्यास है। यह विषय है, गहनों के प्रति पत्नी के लगाव का पति के जीवन पर प्रभाव। गबन में टूटते मूल्यों के अंधेरे में भटकते मध्यवर्ग का वास्तविक चित्रण किया गया।

7 .शिव चालीसा

Shiv Chalisa 

शिव चालीसा का पाठ भोले बाबा की कृपा पाने का अचूक उपाय है।आपको यहाँ पर शिव चालीसा हिंदी में आपके सामने प्रस्तुत करते हुए हमें बहुत ही हर्ष का अनुभव हो रहा है। भगवान शंकर तो परम दयालु हैं। वे अल्प भक्ति में ही महान फल देने वाले हैं। शिव चालीसा का नियमित पाठ महादेव को प्रसन्न करने वाला है। पढ़ें शिव चालीसा और भगवान की कृपा के पात्र बनें–

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान॥

Q . शिव जी का पाठ क्यों करना चाहिए ?

Ans . शिव चालीसा का पाठ प्रतिदिन करने से मन शांत रहता है तथा जीवन की समस्याओं को भगवान Shri Shiv जी शीघ्र ही दुर करते हैं | शिव चालीसा का पाठ करने एवं सुनाने मात्र से व्यक्ति का जीवन खुशहाल एवं घर में सुख, शांति, धन और वैभव में वृद्धि के साथ-साथ रोग एवं महामारी से बचने में भी सहायक होती है |

शिव जी को ऐसे ही नहीं, भोले बाबा कहा जाता है, जो कोई भी इनकी सच्चे मन से अराधना करता है उसको भगवान शिव का आशीर्वाद शीघ्र ही प्राप्त हो जाता है चाहे भक्त दुष्ट ही क्यों ना हो | जैसे रावण दुष्ट था पर भगवान श्री शिव का बहुत बडा भक्त भी था और रावण को शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त था

8.श्रीवाल्मिकी रामायण 

 Shree Valmiki Ramayan

वाल्मीकि रामायण विवरण ‘रामायण’ लगभग चौबीस हज़ार श्लोकों का एक अनुपम महाकाव्य है, जिसके माध्यम से रघु वंश के राजा राम की गाथा कही गयी है।
रचनाकार -महर्षि वाल्मीकि
रचनाकाल -त्रेता युग
भाषा – संस्कृत
रामायण के सात अध्याय हैं, जो काण्ड के नाम से जाने जाते हैं :- बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड), उत्तराकाण्ड।
रामायण के सात काण्डों में कथित सर्गों की गणना करने पर सम्पूर्ण रामायण में 645 सर्ग मिलते हैं। सर्गानुसार श्लोकों की संख्या 23,440 आती है, जो 24,000 से 560 श्लोक कम है।
रामायण वाल्मीकि द्वारा लिखा गया संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य है, जिसका हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसके 24,000 श्लोक हिन्दू स्मृति का वह अंग हैं, जिसके माध्यम से रघुवंश के राजा राम की गाथा कही गयी। इसे ‘वाल्मीकि रामायण’ या ‘बाल्मीकि रामायण’ भी कहा जाता है।
Q.वाल्मीकि रामायण में कितने कांड है उनके नाम?
Ans.रामायण महाकाव्य में कुल 24,000 श्लोक, 500 उपखंड तथा 7 काण्ड (अध्याय) है। इन सात काण्डो के नाम – बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड (युदध्काण्ड) तथा उत्तरकाण्ड है। इनमें से सबसे बड़ा अध्याय बालकाण्ड तथा सबसे छोटा किष्किन्धाकाण्ड है।
Q.वाल्मीकि रामायण का काल क्या है?
Ans.द्ध का समय पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व माना जाता है। इसके आधार पर रामायण का समय इससे पूर्व का होना चाहिए। परन्तु अधिकांश भारतीय एवं पाश्चात्य विद्वानों द्वारा वाल्मीकि रामायण का समय तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व स्वीकार किया जाता है
Q.असली रामायण कौन सी है?
Ans.वर्तमान में राम के चरित्र पर आधारित जितने भी ग्रन्थ उपलब्ध हैं उन सभी का मूल महर्षि वाल्मीकि कृत ‘वाल्मीकीय रामायण‘ ही है। ‘वाल्मीकीय रामायण‘ के प्रणेता महर्षि वाल्मीकि को ‘आदिकवि’ माना जाता है और इसीलिए यह महाकाव्य ‘आदिकाव्य’ माना गया है।
Q.कुल कितने रामायण है?
Ans.हिन्दी में कम से कम 11, मराठी में 8, बाङ्ला में 25, तमिल में 12, तेलुगु में 12 तथा उड़िया में 6 रामायणें मिलती हैं। हिंदी में लिखित गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरित मानस ने उत्तर भारत में विशेष स्थान पाया। इसके अतिरिक्त भी संस्कृत,गुजराती, मलयालम, कन्नड, असमिया, उर्दू, अरबी, फारसी आदि भाषाओं में राम कथा लिखी गयी।

9.ऋग्वेद

Rigved

सनातन धर्म का सबसे आरम्भिक स्रोत है। इसमें 10 मण्डल, 1017 सूक्त और वर्तमान में 10,600 मन्त्र हैं, मन्त्र संख्या के विषय में विद्वानों में कुछ मतभेद है। इसमें देवताओं का यज्ञ में आह्वान करने के लिये मन्त्र हैं।

ऋग्वेद सनातन धर्म अथवा हिन्दू धर्म का स्रोत है । इसमें 1028 सूक्त हैं, जिनमें देवताओं की स्तुति की गयी है। इस ग्रंथ में देवताओं का यज्ञ में आह्वान करने के लिये मन्त्र हैं। यही सर्वप्रथम वेद है। ऋग्वेद को दुनिया के सभी इतिहासकार हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार की सबसे पहली रचना मानते हैं। ये दुनिया के सर्वप्रथम ग्रन्थों में से एक है। ऋक् संहिता में 10 मंडल, बालखिल्य सहित 1028 सूक्त हैं। वेद मंत्रों के समूह को ‘सूक्त’ कहा जाता है, जिसमें एकदैवत्व तथा एकार्थ का ही प्रतिपादन रहता है। ऋग्वेद के सूक्त विविध देवताओं की स्तुति करने वाले भाव भरे गीत हैं। इनमें भक्तिभाव की प्रधानता है। यद्यपि ऋग्वेद में अन्य प्रकार के सूक्त भी हैं, परन्तु देवताओं की स्तुति करने वाले स्रोतों की प्रधानता है।

Q.ऋग्वेद के रचयिता कौन हैं?

Ans.ऋग्वेद – ऋग्वेद की रचना किसने की है – वेदव्यास

यह सबसे प्राचीनतम वेद ग्रंथ है। इसकी रचना ‘सप्त सैंधव क्षेत्र’ में हुई। ऋग्वेद में 10 मंडल, 1028 श्लोक ( 1017 सूक्त और 11 बालखिल्य ) और लगभग 10600 मंत्र हैं। इस वेद मे अग्नि, सूर्य, इंद्र, वरुण देवताओं की प्रार्थना का वर्णन है।

Q.ऋग्वेद में क्या क्या लिखा है?

Ans.ऋग्वेद की ऋचाओं में देवताओं की प्रार्थना, स्तुतियां और देवलोक में उनकी स्थिति का वर्णन है। इसमें जल चिकित्सा, वायु चिकित्सा, सौर चिकित्सा, मानस चिकित्सा और हवन द्वारा चिकित्सा का आदि की भी जानकारी मिलती है। ऋग्वेद में च्यवनऋषि को पुनः युवा करने की कथा भी मिलती है।

Q.ऋग्वेद कब लिखा गया?

Ans.कुछ लोग इसका रचना-काल 1000 ई०पू० के लगभग बताते हैं। कुछ विद्वान इसकी तिथि 3000 और 2500 ई०पू० के लगभग बताते हैं। कुछ विद्वान इसकी तिथि 3000 और 2500 ई०पू० के मध्य निश्चित करते हैं। (1) प्रो० मैक्स मूलर (Max Mueller) का मत था कि ऋग्वेद की रचना 1000 ई०पू० तक पूर्ण हो गई होगी।

Q.वेद में क्या लिखा है?

Ans.सरल शब्दों में कहा जाए तो वेद भारतीय और विशेषकर हिन्दू धर्म के वे ग्रंथ हैं। इनमें ज्योतिष, गणित, विज्ञान, धर्म, औषधि, प्रकर्ति, खगोल शास्त्र और इन सबसे संबन्धित सभी विषयों के ज्ञान का अकूत भंडार भरा पड़ा है। ऋषि-मुनियों द्वारा रचे वेद हिन्दू संस्कृति की रीढ़ माने जाते हैं।

Q.ऋग्वेद में पुजारी को क्या कहा जाता है?

Ans.हिंदुओं के प्राचीनतम उपलब्ध ग्रंथ ऋग्वेद में पुरोहित का वर्णन है। … पुरोहित अधिकतर ब्राह्मण होते थे। पुरोहित और पारीक एक ही है । इनमें से बहुत से राजाओं तथा धनीमानी व्यक्तियों के यहाँ धार्मिक कृत्य करो के लिये नियुक्त रहते थे।

10.बौद्ध – संस्कृति

                                                                        Bauddha Sanskriti

बौद्ध संस्कृति भारत की आदर्श संस्कृति रहीं हैं। इस संस्कृति की अमुल्य निधि भारत के कण-कण में व्याप्त हैं। … बौद्ध संस्कृति में दुनिया की मानव जाति को करूणा, मैत्रि, सद्भाव, विश्व बन्धुत्व और विश्व शांति का संदेश देकर भारतीय एकता के सुत्र में पिराने का महत्वपूर्ण कार्य किया हैं।

बौद्ध धर्मभारत  की श्रमण परम्परा  से निकला ज्ञान धर्म  और दर्शन है। ईसा पूर्व छठवीं शताब्दी मेंगौतम बुद्ध द्वारा बौद्ध धर्म का प्रवर्तन किया गया। गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुम्बिनी  (वर्तमाननेपाल  में) में में हुआ, उन्हें बोध गया में ज्ञान की प्राप्ति हुई, जिसके बाद सारनाथ में प्रथम उपदेश  दिया, और उनका महापारिनिर्माण  483 ईसा पूर्व कुशीनगर ,भारत में हुआ था। उनके महापारिनिर्माण के अगले पाँच शताब्दियों में, बौद्ध धर्म पूरे भारतीय उपनाम में फैला और अगले दो हजार वर्षों में मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशिया में भी फैल गया।

Q.बौद्ध धर्म से पहले कौन सा धर्म था?

Ans.उन्होंने ही पारसी धर्म की स्थापना की थी । यह धर्म कभी ईरान का राजधर्म हुआ करता था । हालांकि इतिहासकारों का मत है कि जरथुस्त्र 1700-1500 ईपू के बीच हुए थे । कहा जाता है कि ईसाई और इस्लाम धर्म से पूर्व बौद्ध धर्म की उत्पत्ति हुई थी ।

Q.बौद्ध धर्म का प्रमुख ग्रंथ कौन सा है?

Ans.त्रिपिटक (पाली:तिपिटक; शाब्दिक अर्थ: तीन पिटारी) बौद्ध धर्म का प्रमुख ग्रंथ है जिसे सभी बौद्ध सम्प्रदाय (महायान, थेरवाद, बज्रयान, मूलसर्वास्तिवाद आदि) मानते है। यह बौद्ध धर्म के प्राचीनतम ग्रंथ है जिसमें भगवान बुद्ध के उपदेश संग्रहीत है। यह ग्रंथ पालि भाषा में लिखा गया है और विभिन्न भाषाओं में अनुवादित है।

Q.बौद्ध धर्म में निर्वाण का क्या अर्थ है?

Ans.श्रमण विचारधारा में (संस्कृत: निर्वाण;पालि : निब्बान;) पीड़ा या दु:ख से मुक्ति पाने की स्थिति है। पाली में “निब्बाण” का अर्थ है “मुक्ति पाना”- यानी, लालच, घृणा और भ्रम की अग्नि से मुक्ति। यह बौद्ध धर्म का परम सत्य है और जैन धर्म का मुख्य सिद्धांत।

Q.बौद्ध धर्म में कौन सी जाति आती है?

Ans.कहते हैं बौद्ध मत में जाति नहीं होती, ना ही इसमें देवी-देवता का कोई कांसेप्ट होता है, ये धम्म में विश्वास करते हैं, अहिंसा जिनका मूल दर्शन है

Q.बौद्ध धर्म में मृत्यु को क्या कहते हैं?

Ans.80 वर्ष की आयु में मृत्यु